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बरेली में विशेष रोल प्रेक्षक की बैठक, राजनीतिक दलों ने मतदाता सूची पर उठाए कई सवाल

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बरेली में शुक्रवार को विशेष रोल प्रेक्षक Sanjay Kumar Agrawal की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में मतदाता सूची के पुनरीक्षण, नोटिसों की सुनवाई और बूथ निर्धारण से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक के दौरान भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस सहित विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने, नाम कटने, सुनवाई केंद्रों की व्यवस्था और बूथों के पुनर्गठन को लेकर अपनी-अपनी चिंताएं व्यक्त कीं। विशेष रोल प्रेक्षक ने सभी बिंदुओं पर क्रमवार स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की शंका या समस्या होने पर जिला निर्वाचन अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।

निर्वाचन आयोग की मंशा स्पष्ट

विशेष रोल प्रेक्षक ने कहा कि Election Commission of India की प्राथमिकता है कि पात्र मतदाताओं का नाम सूची से न छूटे और अपात्र व्यक्तियों का नाम शामिल न हो। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि यदि जनता की ओर से कोई शिकायत या सुझाव प्राप्त होता है, तो उसे प्रशासन तक पहुंचाया जाए, जिससे समय रहते समाधान संभव हो सके।

नोटिस सुनवाई और एईआरओ तैनाती पर सुझाव

बैठक में भाजपा के जिला अध्यक्ष आदेश प्रताप सिंह ने सुझाव दिया कि नोटिस सुनवाई केंद्रों पर भीड़ अधिक होने से लोगों को असुविधा होती है। कई लोग लंबी कतारों के कारण बिना सुनवाई के लौट जाते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) को क्षेत्रीय स्तर पर भी भेजा जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर सुनवाई हो सके।

बसपा प्रतिनिधि ने रोजगार के सिलसिले में बाहर रहने वाले लोगों के मतदाता पंजीकरण में आ रही दिक्कतों का मुद्दा उठाया और इस पर विशेष ध्यान देने की मांग की।

बूथ बढ़ने और वोट घटने पर सवाल

समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधि ने कहा कि जहां बूथों की संख्या बढ़ाई गई है, वहीं एसआईआर प्रक्रिया में मतदाताओं की संख्या कम होती दिख रही है। उन्होंने मतदाताओं की संख्या के अनुरूप बूथों की पुनर्समीक्षा का सुझाव दिया। साथ ही, दूरस्थ नोटिस सुनवाई केंद्रों के कारण मतदाताओं को हो रही असुविधा का भी उल्लेख किया गया।

एक अन्य मुद्दे के रूप में बताया गया कि एक ही परिवार के सदस्यों के नाम अलग-अलग बूथों पर दर्ज हो गए हैं, जिससे मतदान के दिन परेशानी हो सकती है। इस पर अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि फॉर्म-8 के माध्यम से बूथ परिवर्तन कराया जा सकता है। साथ ही, यह भी बताया गया कि नए नाम जोड़े जाने की प्रक्रिया जारी है और अंतिम प्रकाशन के बाद ही मतदाताओं की वास्तविक संख्या स्पष्ट होगी। इसके आधार पर बूथ निर्धारण पर निर्णय लिया जाएगा।

फॉर्म 9, 10 और 11 की दी जानकारी

बैठक में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने फॉर्मेट 9, 10 और 11 के संबंध में भी जानकारी मांगी। अधिकारियों ने बताया कि फॉर्मेट 9 में फॉर्म 6 की समरी, फॉर्मेट 10 में फॉर्म 7 की समरी तथा फॉर्मेट 11 में फॉर्म 8 की समरी शामिल होती है। यह भी स्पष्ट किया गया कि फॉर्म 7 केवल वही व्यक्ति प्रस्तुत कर सकता है जो स्वयं मतदाता हो और उस पर उसके हस्ताक्षर अनिवार्य हैं।

समस्याओं के समाधान का आश्वासन

विशेष रोल प्रेक्षक ने सभी प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया कि किसी भी प्रकार की समस्या होने पर सीधे जिला निर्वाचन अधिकारी से संपर्क किया जाए, ताकि समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सके। जिला निर्वाचन अधिकारी Avinash Singh ने भी आश्वस्त किया कि संबंधित ईआरओ या उप जिला निर्वाचन अधिकारी से संपर्क कर समस्याओं का निस्तारण कराया जा सकता है।

बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने कहा कि मतदाता सूची की पारदर्शिता और शुद्धता बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है, और इसके लिए सभी पक्षों के सहयोग की अपेक्षा है।

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