वैलेंटाइन डे पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का बयान, बोले—दूसरे धर्म की संस्कृति अपनाना इस्लाम में नाजायज

वैलेंटाइन डे पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी की आपत्ति
पश्चिमी देशों में प्रचलित प्रेम दिवस वैलेंटाइन डे का असर भारत में भी देखा जा रहा है। हालांकि, इस आयोजन को लेकर विभिन्न धार्मिक संगठनों की ओर से आपत्तियां सामने आई हैं। इसी क्रम में बरेली के धर्मगुरु Shahabuddin Razvi Bareilvi ने वैलेंटाइन डे मनाने को इस्लामी शिक्षाओं के विरुद्ध बताया है।
‘आस्था और संस्कृति से होती है पहचान’
All India Muslim Jamaat के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि किसी भी समुदाय की पहचान उसकी आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं से होती है। उनके अनुसार जब कोई समाज अपनी धार्मिक मान्यताओं से हटकर दूसरे धर्म या संस्कृति के रीति-रिवाज अपनाता है, तो वह मानसिक रूप से पराधीनता की ओर बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि वैलेंटाइन डे जैसे आयोजनों का इस्लामी परंपरा में कोई स्थान नहीं है। इसे अपनाना धार्मिक सिद्धांतों के विपरीत है।
शरियत के हवाले से दी नसीहत
मौलाना ने कहा कि शरियत की दृष्टि से वैलेंटाइन डे मनाना उचित नहीं है। उन्होंने हया और मर्यादा पर बल देते हुए कहा कि इस्लाम में आचरण की शालीनता को विशेष महत्व दिया गया है। हदीस का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जो समुदाय दूसरे धर्म की संस्कृति को अपनाता है, उसे उसी के साथ जोड़ा जाता है।
उन्होंने मुस्लिम युवाओं से अपील की कि वे धार्मिक निर्देशों का पालन करें और ऐसे आयोजनों से दूरी बनाए रखें। मौलाना ने कहा कि समाज को अपनी धार्मिक पहचान और मूल्यों के प्रति सजग रहना चाहिए।
धार्मिक संगठनों की ओर से आए इस बयान के बाद वैलेंटाइन डे को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।






