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बरेली-आगरा-झांसी-ललितपुर कॉरिडोर को मंजूरी, सभी एक्सप्रेसवे होंगे आपस में कनेक्ट

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उत्तर प्रदेश में सड़क अवसंरचना को एकीकृत और सुदृढ़ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए शासन ने बरेली-आगरा-झांसी-ललितपुर कॉरिडोर को औपचारिक मंजूरी प्रदान कर दी है। इस परियोजना का उद्देश्य प्रदेश के प्रमुख एक्सप्रेसवे, नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे को एक-दूसरे से जोड़ते हुए एक व्यापक परिवहन गलियारा विकसित करना है।

अधिकारियों के अनुसार, अगले पांच वर्षों में प्रदेश से गुजरने वाले सभी प्रमुख मार्गों को आपस में कनेक्ट करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे औद्योगिक, व्यावसायिक और लॉजिस्टिक गतिविधियों को नई गति मिल सके।

कई एजेंसियां मिलकर करेंगी क्रियान्वयन

National Highways Authority of India (NHAI) के बरेली डिवीजन के परियोजना निदेशक नवरत्न सिंह ने बताया कि गोरखपुर–पानीपत एक्सप्रेसवे बरेली की नवाबगंज और बहेड़ी तहसील से होकर प्रस्तावित है। इस परियोजना के लिए टोकन मनी जारी हो चुकी है और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रारंभिक चरण में है।

कॉरिडोर के विकास के लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा), एनएचएआई और अन्य संबंधित विभाग संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। शासन ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए लगभग 7,000 करोड़ रुपये का बजट प्रावधानित किया है।

सात एक्सप्रेसवे होंगे एक नेटवर्क में शामिल

प्रस्तावित कॉरिडोर प्रदेश के सात प्रमुख एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़ेगा। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • गंगा एक्सप्रेसवे – 594 किमी

  • पूर्वांचल एक्सप्रेसवे – 341 किमी

  • आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे – 302 किमी

  • बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे – 296 किमी

  • यमुना एक्सप्रेसवे – 165 किमी

  • गाजियाबाद-कानपुर एक्सप्रेसवे – 380 किमी

  • गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे – 750 किमी (प्रस्तावित)

गोरखपुर–पानीपत एक्सप्रेसवे को प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे माना जा रहा है, जो बरेली सहित कई जिलों को सीधे जोड़ेगा।

गंगा और यमुना एक्सप्रेसवे से मजबूत होगी कनेक्टिविटी

मेरठ से प्रयागराज तक विस्तृत गंगा एक्सप्रेसवे बदायूं के बिनावर क्षेत्र में बरेली-मथुरा हाईवे से जुड़ता है। इसके अलावा यह मुरादाबाद-फर्रुखाबाद हाईवे से भी कनेक्टिविटी प्रदान करता है।

वहीं बरेली-मथुरा मार्ग वृंदावन के समीप यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ता है, जिससे पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन सुगम होता है। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे भी यमुना एक्सप्रेसवे से कनेक्ट होकर दक्षिणी जिलों को मुख्य धारा से जोड़ता है।

आर्थिक और रणनीतिक महत्व

विशेषज्ञों का मानना है कि बरेली-आगरा-झांसी-ललितपुर कॉरिडोर प्रदेश में औद्योगिक निवेश, वेयरहाउसिंग, कृषि लॉजिस्टिक्स और परिवहन क्षेत्र को व्यापक लाभ पहुंचाएगा। यह परियोजना पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और पूर्वांचल को एक साझा आर्थिक गलियारे में परिवर्तित कर सकती है।

बेहतर कनेक्टिविटी से यात्रा समय में कमी, ईंधन की बचत और माल परिवहन की लागत में गिरावट आने की संभावना है, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।

गंगा एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा उपाय सुदृढ़

शाहजहांपुर के जलालाबाद क्षेत्र में गंगा एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा मानकों को और मजबूत किया गया है। बदायूं से हरदोई सीमा तक लगभग 151 किलोमीटर क्षेत्र में बीम क्रैश बैरियर लगाए जा चुके हैं।

छुट्टा पशुओं की समस्या को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील स्थानों पर पक्की चहारदीवारी का निर्माण किया जा रहा है। मार्च तक अस्थायी फेंसिंग हटाकर स्थायी संरचना स्थापित करने और अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करने की योजना है।

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