10वीं बोर्ड परीक्षा में बड़ा गड़बड़झाला: Communicative की जगह Literature का पेपर, छात्रों में हड़कंप

10वीं बोर्ड परीक्षा के पहले ही दिन एक गंभीर लापरवाही सामने आई, जिसने छात्रों और उनके अभिभावकों को चिंता में डाल दिया। परीक्षा केंद्र पर ऐसी स्थिति बनी, जिससे पूरे परीक्षा प्रबंधन पर सवाल खड़े हो गए।
जानकारी के अनुसार, विद्यार्थियों से परीक्षा फॉर्म भरवाते समय अंग्रेजी विषय में Communicative English का कोड भरवाया गया था। पिछले कई महीनों से छात्रों को उसी सिलेबस के अनुसार पढ़ाया और तैयार किया जा रहा था। लेकिन परीक्षा के दिन जब प्रश्न-पत्र वितरित किए गए, तो वह पूरी तरह अलग निकला।
छात्रों को जो प्रश्न-पत्र मिला, वह English Literature का था। पेपर देखते ही परीक्षा कक्षों का माहौल बदल गया। छात्रों के बीच घबराहट फैल गई, फुसफुसाहट शुरू हो गई और कुछ ही देर में विरोध के स्वर तेज हो गए। कई विद्यार्थी इस अप्रत्याशित स्थिति से इतने परेशान हो गए कि वे रोने लगे।
छात्रों का कहना था कि उन्होंने पूरी तैयारी Communicative English के आधार पर की थी, जबकि Literature के प्रश्न उनके लिए बिल्कुल अलग और कठिन थे। इस कारण उन्हें अपनी परीक्षा खराब होने और असफल होने का डर सताने लगा।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्कूल प्रशासन ने तत्काल कदम उठाए। बताया जा रहा है कि प्रबंधन ने स्कूल के दोनों मुख्य गेटों को बंद कर दिया, ताकि बाहर की स्थिति और अधिक न बिगड़े और अंदर के हालात पर नियंत्रण रखा जा सके। हालांकि, इस फैसले से स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।
इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल बोर्ड परीक्षा दे रहे छात्रों तक सीमित नहीं रहा। स्कूल परिसर में मौजूद प्राइमरी कक्षाओं के छोटे बच्चे भी इस अव्यवस्था का शिकार बन गए। उनकी छुट्टी का समय लगभग 11:45 बजे तय था, लेकिन गेट बंद होने के कारण वे समय पर बाहर नहीं निकल सके और स्कूल के अंदर ही फंसे रहे।
जब अभिभावक अपने बच्चों को लेने स्कूल पहुंचे और उन्होंने गेट पर ताला लगा देखा, तो वे नाराज हो उठे। मौके पर हंगामे जैसी स्थिति बन गई। अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।
यह पूरा मामला परीक्षा प्रणाली की गंभीर खामियों को उजागर करता है। एक ओर जहां छात्र पूरे साल एक निर्धारित सिलेबस के अनुसार तैयारी करते हैं, वहीं ऐसी लापरवाही उनके भविष्य पर सीधा असर डाल सकती है। अब सभी की नजर प्रशासनिक कार्रवाई और इस गलती के समाधान पर टिकी हुई है।





