बरेली में व्यावसायिक LPG सिलिंडर संकट, होटल-रेस्टोरेंट कारोबार प्रभावित
बरेली में व्यावसायिक LPG सिलिंडरों की कमी से बेकरी उद्योग, होटल-रेस्टोरेंट, मैरिज लॉन और ढाबों का काम प्रभावित हो गया है। बाजार में सिलिंडर 2500 रुपये तक ब्लैक में बिक रहे हैं, जिससे कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है।

बरेली। शहर में व्यावसायिक LPG सिलिंडरों की कमी ने होटल, रेस्टोरेंट, बेकरी उद्योग, मैरिज लॉन और ढाबा संचालकों की परेशानी बढ़ा दी है। स्थिति यह है कि बाजार में सिलिंडर आसानी से उपलब्ध नहीं हो रहे हैं और कुछ स्थानों पर इन्हें ब्लैक में 2500 रुपये तक में बेचे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कारोबारियों का कहना है कि यदि जल्द आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो कई प्रतिष्ठानों को काम बंद करने की नौबत आ सकती है।
व्यावसायिक सिलिंडरों की कमी का असर खासतौर पर उन कारोबारों पर पड़ा है, जहां प्रतिदिन बड़ी मात्रा में गैस की खपत होती है। रेस्टोरेंट और मैरिज लॉन संचालकों का कहना है कि उन्होंने महीनों पहले से कार्यक्रमों की बुकिंग ले रखी है, लेकिन अब सिलिंडर की उपलब्धता न होने से कार्यक्रमों को संभालना मुश्किल हो रहा है।
बेकरी और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों पर असर
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (IIA) के बरेली चैप्टर के चेयरमैन मयूर धीरवानी के अनुसार शहर की कई बेकरी और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों में एलपीजी की सप्लाई प्रभावित हो चुकी है। ऐसे में कुछ इकाइयों ने अस्थायी तौर पर PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) का इस्तेमाल शुरू किया है।
हालांकि उनका कहना है कि सीयूजीएल की ओर से पीएनजी की दरों में बढ़ोतरी की आशंका भी जताई जा रही है। यदि गैस की कीमतें बढ़ती हैं या सप्लाई बाधित होती है तो खाद्य उद्योग की लागत और बढ़ जाएगी। इसके साथ ही प्लास्टिक दाने की कीमतें बढ़ने से पैकेजिंग सामग्री भी महंगी हो गई है, जिससे खाद्य उत्पादों के दाम बढ़ने की संभावना है।
छोटे होटल और ढाबे बंदी के कगार पर
बरेली होटेलियर वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारी डॉ. अनुराग सक्सेना का कहना है कि बड़े होटलों के पास फिलहाल पुराना स्टॉक मौजूद है, लेकिन छोटे होटल और ढाबे गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। उन्होंने बताया कि गैस आपूर्ति प्रभावित होने के कारण कई जगह पीएनजी का सहारा लिया जा रहा है, लेकिन यह भी स्थायी समाधान नहीं है। यदि जल्द आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो कई छोटे प्रतिष्ठानों को बंद करना पड़ सकता है।
सिलिंडरों की कालाबाजारी के आरोप
रेस्टोरेंट संचालक गौरांग खन्ना ने आरोप लगाया कि कुछ डिलीवरी मैन व्यावसायिक सिलिंडर बाजार में ब्लैक में 2500 रुपये तक में बेच रहे हैं, जबकि इसकी वास्तविक कीमत लगभग 1980 रुपये है। उन्होंने बताया कि यदि अगले कुछ दिनों में स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो कारोबार चलाना मुश्किल हो जाएगा। फिलहाल कारोबारियों ने एक सप्ताह तक हालात पर नजर रखने का निर्णय लिया है।
कोयला भी महंगा, बढ़ी लागत
ढाबा संचालकों का कहना है कि गैस के विकल्प के रूप में कोयले का इस्तेमाल भी महंगा पड़ रहा है। बाजार में कोयले की कीमत 3000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच चुकी है, जिससे लागत और बढ़ गई है। इस कारण कई ढाबा संचालकों को कारोबार बंद करने की चिंता सताने लगी है।
ढाबा संचालक विजय कुमार तलवानी के अनुसार उनके ढाबे में रोजाना एक व्यावसायिक सिलिंडर की जरूरत पड़ती है। फिलहाल सिलिंडर ब्लैक में मिल रहा है, लेकिन स्टॉक खत्म होने के बाद स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो ढाबा बंद करना पड़ सकता है।
बैंक्वेट हॉल और कैटरिंग सेवाएं भी प्रभावित
बरेली बैंक्वेट हॉल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष गोपेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि बैंक्वेट हॉल और कैटरिंग सेवाओं के लिए एलपीजी का कोई विकल्प नहीं है। पहले से बुक किए गए कार्यक्रमों में मेहमानों के लिए भोजन की व्यवस्था करना उनकी जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है, जिसका असर स्थानीय बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में होने वाले कार्यक्रमों को लेकर बैंक्वेट हॉल और कैटरिंग संचालकों की चिंता बढ़ गई है।
कारोबारियों का कहना है कि यदि प्रशासन और गैस कंपनियां जल्द आपूर्ति व्यवस्था को सामान्य नहीं करतीं, तो शहर में होटल, रेस्टोरेंट और खाद्य उद्योग के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
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