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उत्तरप्रदेश

बरेली में पूर्व सैनिकों की मांगें: राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन

बरेली में पूर्व सैनिकों ने जिला अधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर डिसेबिलिटी पेंशन पर टैक्स हटाने, ECHS के लिए पर्याप्त बजट और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं सहित कई महत्वपूर्ण मांगें उठाईं।

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बरेली। जिले में पूर्व सैनिकों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर बुधवार को राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन जिला प्रशासन के माध्यम से भेजा गया। ज्ञापन में देश की सेवा करने वाले पूर्व सैनिकों के साथ कथित तौर पर हो रहे भेदभावपूर्ण व्यवहार पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है।

ज्ञापन में कहा गया है कि भारतीय सशस्त्र बलों में बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों के युवा भर्ती होते हैं। अनुमानतः लगभग 90 प्रतिशत सैनिक गांवों और कस्बों से आते हैं, जो देश की सुरक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर देते हैं। ऐसे में सेवा के बाद पूर्व सैनिकों को सम्मानजनक सुविधाएं और सुरक्षा मिलना आवश्यक है।

पूर्व सैनिकों की ओर से राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में कई प्रमुख मांगें उठाई गई हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण मांग युद्ध में घायल सैनिकों को मिलने वाली डिसेबिलिटी पेंशन पर लगाए गए टैक्स को तुरंत समाप्त करने की है। ज्ञापन में कहा गया है कि देश की रक्षा करते हुए घायल हुए सैनिकों पर किसी भी प्रकार का कर लगाया जाना अनुचित है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।

इसके अलावा पूर्व सैनिकों ने Ex-Servicemen Contributory Health Scheme (ECHS) के तहत मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि इस योजना में फंड की कमी नहीं होनी चाहिए और सरकार को इसके लिए पर्याप्त बजट सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।

ज्ञापन में चिकित्सा व्यवस्था से जुड़ी एक और मांग उठाई गई है। पूर्व सैनिकों का कहना है कि उनके इलाज के लिए जन औषधि केंद्रों के माध्यम से दी जाने वाली दवाओं को बंद किया जाए और उनके स्थान पर उच्च गुणवत्ता और मानक वाली दवाएं उपलब्ध कराई जाएं। उनका तर्क है कि देश की रक्षा करने वाले सैनिकों को इलाज के मामले में सर्वोत्तम सुविधाएं मिलनी चाहिए।

इसके साथ ही ज्ञापन में पूर्व सैनिकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को भी उठाया गया है। इसमें कहा गया है कि कई मामलों में पूर्व सैनिकों के साथ पुलिस या सिविल प्रशासन से जुड़े विवाद सामने आते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा और सम्मान पर प्रश्न खड़े होते हैं। इसलिए सरकार से मांग की गई है कि ऐसे मामलों पर सख्ती से रोक लगाई जाए और पूर्व सैनिकों को उचित सुरक्षा दी जाए।

पूर्व सैनिकों ने प्रशासनिक भागीदारी से जुड़ी एक और मांग भी रखी है। उनका कहना है कि जिले में संचालित विभिन्न विकास समितियों और परामर्श समितियों में पूर्व सैनिकों को प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए, ताकि वे अपने अनुभव और सुझावों के माध्यम से समाज और प्रशासन के विकास में योगदान दे सकें।

ज्ञापन के माध्यम से यह भी कहा गया कि पूर्व सैनिकों ने देश के लिए अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा समर्पित किया है, इसलिए उनके अधिकारों और सुविधाओं को लेकर सरकार को संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए।

यह ज्ञापन गौरव सेनानी सेवा समिति (पंजीकृत), बरेली के राष्ट्रीय सचिव शिशुपाल सौर्य की ओर से जिला अधिकारी के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति को भेजा गया।

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