बरेली में किसानों का प्रदर्शन, 15 मांगों को लेकर प्रशासन पर दबाव

बरेली में किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन करते हुए प्रशासन पर दबाव बनाया। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए और मंडलायुक्त को 15 सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के समाधान की मांग की।
किसानों की प्रमुख मांगें और मुद्दे
जिला अध्यक्ष चौधरी सोमवीर सिंह के नेतृत्व में पहुंचे किसानों ने कृषि भूमि अधिग्रहण, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), गन्ना भुगतान, अवैध कॉलोनियों और सरकारी योजनाओं में आ रही दिक्कतों को प्रमुखता से उठाया।
किसानों का आरोप है कि बरेली विकास प्राधिकरण द्वारा बड़े स्तर पर कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। रामगंगा नगर जैसी आवासीय योजनाओं के चलते खेती योग्य जमीन कम होती जा रही है। उनका कहना है कि बहुमंजिला परियोजनाओं के माध्यम से भूमि का बेहतर उपयोग किया जा सकता था।
अवैध कॉलोनियों और प्लॉटिंग पर सख्ती की मांग
प्रदर्शन के दौरान अवैध कॉलोनियों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। किसानों ने आरोप लगाया कि गांवों में बिना नक्शा पास कराए प्लॉटिंग कर जमीन बेची जा रही है, जिससे अनियंत्रित निर्माण बढ़ रहा है। उन्होंने इस पर सख्त कार्रवाई और जागरूकता अभियान चलाने की मांग की।
MSP और फसलों के दाम को लेकर उठी आवाज
किसानों ने आम के लिए 60 रुपये प्रति किलो समर्थन मूल्य तय करने और उसकी सरकारी खरीद सुनिश्चित करने की मांग की। इसके साथ ही आलू, सरसों, बाजरा, ज्वार और मक्का जैसी फसलों के लिए भी लाभकारी मूल्य निर्धारित करने की बात कही गई।
खरीद केंद्र और गन्ना भुगतान पर नाराजगी
किसानों ने गेहूं खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि सरकारी और बाजार भाव में भारी अंतर के कारण बिचौलियों का प्रभाव बढ़ गया है। उन्होंने प्रत्येक तहसील में कम से कम 60 खरीद केंद्र खोलने और उन्हें गांव से पांच किलोमीटर के दायरे में स्थापित करने की मांग की।
इसके अलावा बहेड़ी और नवाबगंज चीनी मिलों द्वारा गन्ना भुगतान में देरी पर भी नाराजगी जताई गई और जल्द भुगतान सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई।
आवारा पशु और योजनाओं में देरी पर चिंता
प्रदर्शन में आवारा पशुओं से फसलों को हो रहे नुकसान का मुद्दा भी प्रमुख रहा। किसानों ने इन्हें गौशालाओं में भेजने की मांग की। साथ ही राशन कार्ड, किसान सम्मान निधि और राजस्व से जुड़े मामलों में हो रही देरी पर भी असंतोष जताया गया।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
किसान यूनियन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।






