नवाबगंज की गोशाला में बड़ा खुलासा: 54 गोवंशों की मौत, रजिस्टर में सिर्फ 5 दर्ज

नवाबगंज की गोशाला में बड़ा खुलासा: 54 गोवंशों की मौत, रजिस्टर में सिर्फ 5 दर्ज
भूख और कुपोषण से तड़पते रहे गोवंश, जांच में खुली विभागीय लापरवाही की परतें
रिपोर्ट : देवेंद्र पटेल, बरेली
बरेली के नवाबगंज स्थित वृहद गोवंश संरक्षण केंद्र मधुनगला में गोवंशों की देखरेख को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। जिला स्तरीय जांच में खुलासा हुआ है कि अगस्त 2025 से अप्रैल 2026 के बीच गोशाला में 54 गोवंशों की मौत हो गई, लेकिन सरकारी अभिलेखों में केवल पांच मौतें दर्ज कर पूरी सच्चाई छिपाने की कोशिश की गई। इस खुलासे के बाद पंचायत और पशुपालन विभाग में हड़कंप मच गया है।
जिला विकास अधिकारी दिनेश यादव और मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनमोहन पांडेय की संयुक्त जांच में यह गंभीर अनियमितता सामने आई। जांच के दौरान पाया गया कि पशु चिकित्साधिकारी द्वारा जारी 54 मृत्यु प्रमाण पत्र मौजूद हैं, जबकि गोशाला की लॉग बुक पंजिका में केवल पांच गोवंशों की मृत्यु दर्ज की गई है। अधिकारियों ने जब इस भारी अंतर पर जवाब मांगा तो ग्राम प्रधान, केयरटेकर और संबंधित कर्मचारियों की ओर से कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया जा सका।
चारे के अभाव में कंकाल बने गोवंश
जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि गोशाला में लंबे समय से चारा और भूसे का गंभीर संकट बना हुआ था। पर्याप्त भोजन न मिलने के कारण 30 से 40 गोवंश बेहद कमजोर और कुपोषण का शिकार पाए गए। कई गोवंशों की हालत इतनी खराब थी कि उनके शरीर केवल हड्डियों का ढांचा बनकर रह गए थे।
बताया जा रहा है कि पिछले वर्ष अगस्त माह में गोशाला परिसर के बाहर 17 गोवंशों के शव मिलने के बाद ही यह केंद्र प्रशासन की निगरानी में आया था। इसके बाद हुई जांच में मौतों का सिलसिला लगातार सामने आता गया। रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2025 में 9, दिसंबर में 10 और अप्रैल 2026 में सबसे अधिक 16 गोवंशों की मौत दर्ज की गई।
कागजों में खेल, जमीन पर मौत का सच
जांच टीम ने पाया कि वास्तविक आंकड़ों को सरकारी रिकॉर्ड से छिपाने का प्रयास किया गया। गोशाला संचालन में पारदर्शिता पूरी तरह गायब मिली। मौतों की संख्या कम दिखाकर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों ने शासन की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश की।
डीडीओ दिनेश यादव ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी को भेज दी गई है। गोवंश संरक्षण में लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में ग्राम प्रधान को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। वहीं बीडीओ, एडीओ पंचायत, पशु चिकित्सा अधिकारी और ग्राम पंचायत सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
पहले भी विवादों में रही सचिव
सूत्रों के मुताबिक ग्राम पंचायत सचिव पर पूर्व में भी कार्रवाई हो चुकी है और उन्हें निलंबित किया गया था, हालांकि बाद में उन्होंने न्यायालय से स्टे प्राप्त कर लिया था। अब एक बार फिर उनका नाम गंभीर अनियमितताओं में सामने आने के बाद विभागीय कार्रवाई तेज हो गई है।
सवालों के घेरे में गोवंश संरक्षण व्यवस्था
सरकार द्वारा गोवंश संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन नवाबगंज की यह तस्वीर व्यवस्था की पोल खोलती नजर आ रही है। सवाल उठ रहा है कि जब गोशाला में लगातार गोवंश मर रहे थे तो जिम्मेदार अधिकारी आखिर क्या कर रहे थे?
अब देखना होगा कि जांच रिपोर्ट के बाद दोषियों पर केवल नोटिस जारी होते हैं या फिर इस पूरे मामले में कड़ी प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई भी होती है।





