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बरेली

UP PCS 2024: बरेली की आकांक्षा ने पहले प्रयास में मारी बाजी, संविदाकर्मी समेत कई युवाओं ने पाई सफलता

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यूपी पीसीएस 2024 के घोषित परिणाम में बरेली जिले के कई प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। खास बात यह रही कि विभिन्न सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों के बावजूद युवाओं ने अपनी मेहनत के दम पर प्रशासनिक सेवाओं में जगह बनाई। इनमें दो बच्चों की मां से लेकर संविदा कर्मचारी और किसान के बेटे तक शामिल हैं।

दुर्गा नगर निवासी 34 वर्षीय आकांक्षा सक्सेना ने पहले ही प्रयास में सफलता प्राप्त कर नायब तहसीलदार पद हासिल किया है। वर्तमान में वह बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत हैं। आकांक्षा की शादी महज 18 वर्ष की उम्र में हो गई थी, उस समय वह स्नातक द्वितीय वर्ष में थीं। शादी के बाद उन्होंने अपने ससुर योगेंद्र कुमार कंचन के सहयोग से पढ़ाई जारी रखी और स्नातक के बाद बीएड पूरा किया। वर्ष 2013 में केदारनाथ त्रासदी के दौरान ससुर के लापता हो जाने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और पति शिवम सक्सेना के सहयोग से पढ़ाई और परिवार दोनों को संभाला। दो बच्चों की परवरिश के बीच उन्होंने ऑनलाइन माध्यम, विशेषकर यूट्यूब के जरिए तैयारी कर यह सफलता हासिल की।

इसी तरह सनराइज एन्क्लेव की 26 वर्षीय उपासना मार्छाल ने खंड विकास अधिकारी (BDO) पद पर चयनित होकर जिले का नाम रोशन किया है। यूपीएससी में असफलता के बाद उन्होंने पीसीएस पर फोकस किया और दूसरे प्रयास में सफलता प्राप्त की। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीटेक की पढ़ाई की और वर्ष 2021 से सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। उपासना ने बिना नियमित कोचिंग के केवल टेस्ट सीरीज के माध्यम से अपनी तैयारी को मजबूत किया।

गांव गुलड़िया अरिल के किसान परिवार से आने वाले शैलेंद्र कुमार ने पहले प्रयास में ही असिस्टेंट कमिश्नर (वाणिज्य कर) पद हासिल किया। उनकी प्रारंभिक शिक्षा चंदौसी से हुई और आगे की पढ़ाई के बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की। उनकी सफलता में उनकी मां की प्रेरणा और परिवार का सहयोग अहम रहा।

इज्जतनगर क्षेत्र के अतहर जमाल खान का चयन पंचायती राज विभाग में कार्य अधिकारी पद पर हुआ है। उन्होंने वर्ष 2015 से तैयारी शुरू की थी। शुरुआती चुनौतियों और कोरोना महामारी के कारण उनकी तैयारी प्रभावित हुई, लेकिन लगातार प्रयास जारी रखते हुए उन्होंने इस बार सफलता हासिल की।

वहीं, कुशाग्र प्रकाश ने नायब तहसीलदार पद पर चयनित होकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। उन्होंने वर्क फ्रॉम होम के साथ तैयारी करते हुए पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की। आईआईटी धनबाद से इंजीनियरिंग करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा को अपना लक्ष्य बनाया।

बहेड़ी क्षेत्र के 42 वर्षीय सुरेश बाबू ने भी अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की। वह वर्ष 2011 से संविदा पर मूकबधिर छात्रों को पढ़ा रहे हैं। व्यक्तिगत और पारिवारिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और आखिरकार सफलता प्राप्त की।

इन सफलताओं से यह स्पष्ट होता है कि सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद यदि दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास किया जाए, तो किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

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