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बरेली

बरेली में 35 करोड़ टैक्स चोरी केस: गैंगस्टर आरोपी की संपत्ति कुर्क, 27 पर कार्रवाई

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उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में शुक्रवार को जिला प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त रूप से बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। 35 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी से जुड़े बहुचर्चित मामले में गैंगस्टर एक्ट के तहत वांछित आरोपियों की संपत्तियों को कुर्क किया गया। इस कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के बीच डर का माहौल बन गया है।

यह कार्रवाई ग्रीन पार्क निवासी मनोज जायसवाल, उसके भाई नीरज जायसवाल समेत कुल 27 आरोपियों के खिलाफ की गई। इन सभी के विरुद्ध पहले से ही गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज है। प्रशासन के मुताबिक, आरोपियों ने अवैध तरीकों से अर्जित धन से संपत्तियां खड़ी की थीं, जिन्हें अब कानून के तहत जब्त किया जा रहा है।

करीब दोपहर 2 बजे मजिस्ट्रेट विदित कुमार के नेतृत्व में गठित टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और कुर्की की प्रक्रिया शुरू की। इस दौरान बरेली और सहारनपुर पुलिस की संयुक्त टीम मौजूद रही। अधिकारियों ने पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी, ताकि कार्रवाई के दौरान किसी तरह की बाधा न उत्पन्न हो।

दरअसल, इस पूरे मामले की जड़ सहारनपुर में स्थित टपरी डिस्टिलरी से जुड़ी है, जहां बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी का खुलासा हुआ था। जांच एजेंसियों ने करीब 35 करोड़ रुपये की कर चोरी का पता लगाया था। इस मामले में 9 दिसंबर को सहारनपुर पुलिस ने फैक्ट्री के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रणय अनेजा के साथ-साथ बरेली निवासी मनोज जायसवाल, नीरज जायसवाल और अन्य के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था।

एफआईआर में पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आरोपियों ने संगठित तरीके से आर्थिक अपराध को अंजाम दिया और अवैध कमाई से संपत्तियां अर्जित कीं। इसके अलावा मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका भी जताई गई है, जिसकी जांच जारी है।

सूत्रों के अनुसार, मुख्य आरोपी मनोज जायसवाल बरेली के मॉडल टाउन क्षेत्र में भी सक्रिय था और वहां उसने अपना ठिकाना बना रखा था। हालांकि गैंगस्टर एक्ट में नाम सामने आने के बाद से वह फरार चल रहा है। पुलिस लगातार उसकी तलाश में दबिश दे रही है।

बताया यह भी जा रहा है कि मनोज जायसवाल का आपराधिक इतिहास पहले से रहा है। वर्ष 2021 में उसके खिलाफ बरेली के बारादरी थाने में भी मुकदमा दर्ज किया गया था। ऐसे में पुलिस उसे एक संगठित आपराधिक नेटवर्क से जुड़ा हुआ मानकर जांच कर रही है।

प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई को आर्थिक अपराधों के खिलाफ बड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी इस तरह की अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से इस तरह के मामलों में कार्रवाई की मांग की जा रही थी। अब जब प्रशासन ने सख्ती दिखाई है, तो इससे आम जनता में कानून व्यवस्था को लेकर भरोसा बढ़ा है।

कुल मिलाकर, 35 करोड़ की टैक्स चोरी से जुड़े इस हाई-प्रोफाइल मामले में संपत्ति कुर्की की कार्रवाई ने साफ संदेश दिया है कि आर्थिक अपराधों और संगठित गिरोहों के खिलाफ प्रशासन अब सख्त रुख अपनाने के मूड में है।

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