बरेली में जहरीले धुएं का खेल: कोयले की जगह प्लास्टिक-कैमिकल से पकाई जा रही ईंटें, आबादी के बीच धधक रहा अवैध भट्टा

बरेली में जहरीले धुएं का खेल: कोयले की जगह प्लास्टिक-कैमिकल से पकाई जा रही ईंटें, आबादी के बीच धधक रहा अवैध भट्टा
बरेली। जनपद के बिथरी चैनपुर क्षेत्र में आबादी के बीच संचालित एक अवैध ईंट भट्टा गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि ईंधन महंगा होने के चलते भट्टा संचालक अब कोयले की जगह प्लास्टिक, केमिकल युक्त कचरा और प्लास्टिक बोतलों की कटिंग जलाकर ईंटें पका रहे हैं। इससे निकल रहा जहरीला धुआं आसपास के ग्रामीणों के लिए बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है।
बताया जा रहा है कि बिथरी चैनपुर मुख्य मार्ग के किनारे घनी आबादी के बीच यह भट्टा लंबे समय से संचालित हो रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात के समय बड़े पैमाने पर प्लास्टिक कचरा जलाया जाता है, जिससे पूरे इलाके में जहरीली दुर्गंध फैल जाती है। धुएं के कारण लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और बच्चों-बुजुर्गों में खांसी जैसी समस्याएं बढ़ने लगी हैं।
“कोयला महंगा तो प्लास्टिक जलाना शुरू”
ग्रामीणों का कहना है कि कोयले की बढ़ती कीमतों के कारण भट्टा संचालकों ने सस्ता विकल्प तलाश लिया है। आरोप है कि प्लास्टिक बोतलों की कटिंग, रबर और अन्य केमिकल युक्त अपशिष्ट को ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक प्लास्टिक जलाने से डाइऑक्सिन और कई जहरीली गैसें निकलती हैं, जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती हैं।
आबादी के बीच चल रहा अवैध संचालन
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि आखिर घनी आबादी और मुख्य मार्ग के किनारे अवैध तरीके से संचालित हो रहे इस ईंट भट्टे पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से तत्काल जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि सुबह और शाम के समय जहरीला धुआं पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लेता है। स्कूल जाने वाले बच्चे, खेतों में काम करने वाले किसान और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई परिवारों ने दावा किया कि लगातार प्रदूषण के कारण लोगों की तबीयत बिगड़ रही है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका पर सवाल
लोगों का कहना है कि यदि भट्टा मानकों के अनुरूप संचालित हो रहा है तो फिर प्लास्टिक और केमिकल जलाने की अनुमति किसने दी? वहीं यदि यह अवैध है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? मामले ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों ने की सख्त कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि:
भट्टे की तत्काल जांच कराई जाए
प्लास्टिक और केमिकल जलाने पर रोक लगे
प्रदूषण फैलाने वालों पर मुकदमा दर्ज हो
आबादी के बीच संचालित अवैध भट्टे को बंद कराया जाए
रिपोर्ट: देवेंद्र पटेल
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