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बरेली

फरीदपुर में सपा का टिकट घमासान: दिग्गज बनाम युवा चेहरों की कड़ी टक्कर

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रिपोर्ट – लाइव भारत टीवी/देवेंद्र पटेल

बरेली। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां जैसे-जैसे तेज हो रही हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों के भीतर हलचल भी बढ़ती जा रही है। बरेली जिले की फरीदपुर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (SP) के भीतर टिकट को लेकर जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। दावेदारों की लंबी सूची ने न केवल पार्टी के भीतर समीकरण जटिल कर दिए हैं, बल्कि स्थानीय राजनीति का पारा भी चढ़ा दिया है।

फरीदपुर सीट पर इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है, जहां अनुभवी नेताओं के साथ-साथ नए और युवा चेहरे भी अपनी दावेदारी मजबूती से पेश कर रहे हैं। हर उम्मीदवार अपने-अपने स्तर पर जनसमर्थन जुटाने और संगठन में पकड़ दिखाने की कोशिश में लगा है।

🔴 अनुभव और पकड़ का समीकरण

फरीदपुर की सियासत में पूर्व विधायक विजयपाल सिंह का नाम सबसे मजबूत दावेदारों में शुमार किया जा रहा है। पिछला चुनाव बेहद कम अंतर से हारने के बावजूद उनकी जमीनी पकड़ और पार्टी संगठन से करीबी संबंध उन्हें अब भी दौड़ में बनाए हुए हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि अनुभव और क्षेत्रीय समझ उन्हें अन्य उम्मीदवारों पर बढ़त दिला सकती है।

इसी श्रेणी में चन्द्र सेन सागर भी तेजी से उभरते हुए चेहरे के रूप में सामने आए हैं। उन्हें पारिवारिक राजनीतिक विरासत के साथ-साथ सागर समाज का समर्थन मिलने की चर्चा है, जो उनके पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैक्टर माना जा रहा है।

🟢 सामाजिक समीकरण और पारिवारिक प्रभाव

फरीदपुर सीट पर जातीय और सामाजिक समीकरण हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में कल्पना सागर की दावेदारी को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। महिला प्रतिनिधित्व के साथ-साथ सागर परिवार से जुड़ाव उन्हें एक अलग पहचान देता है।

वहीं हरीश सागर लाखा लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय रहकर जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर चुके हैं। स्थानीय मुद्दों पर उनकी समझ और निरंतर जनसंपर्क उन्हें एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में पेश करता है।

🔵 युवा नेतृत्व की बढ़ती चुनौती

इस बार फरीदपुर की राजनीति में युवा चेहरों की एंट्री ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है। शालिनी सिंह अपनी साफ-सुथरी छवि और सक्रियता के कारण खासतौर पर शहरी और महिला मतदाताओं के बीच लोकप्रियता हासिल कर रही हैं।

इसी तरह पूनम सेन भी महिला और युवा वर्ग के समर्थन के आधार पर अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटी हैं।

वहीं विशाल गौतम का नाम इस पूरे समीकरण में सबसे अलग नजर आता है। छात्र राजनीति से निकले विशाल गौतम संगठनात्मक अनुभव और युवा ऊर्जा का संतुलित मिश्रण माने जा रहे हैं। पार्टी के विभिन्न पदों पर उनकी सक्रियता और खासकर युवाओं तथा एससी/एसटी वर्ग में उनकी पकड़ उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है।

⚖️ पार्टी के सामने चुनौतीपूर्ण फैसला

फरीदपुर सीट पर समाजवादी पार्टी के लिए इस बार असली चुनौती विपक्ष से ज्यादा आंतरिक संतुलन बनाने की है। एक तरफ अनुभवी नेताओं का दबदबा है, तो दूसरी ओर युवा चेहरों की बढ़ती स्वीकार्यता भी नजर आ रही है। इसके अलावा जातीय समीकरण और स्थानीय नेटवर्क भी टिकट वितरण में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि वह किस फैक्टर को प्राथमिकता देता है—अनुभव, युवा ऊर्जा, या फिर सामाजिक समीकरण।

फिलहाल फरीदपुर की सियासत में एक ही चर्चा जोरों पर है कि आखिरकार समाजवादी पार्टी किस चेहरे पर भरोसा जताएगी और किसके सिर सजेगा टिकट का ताज।

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