बरेली में बिजली संकट से जनजीवन अस्त-व्यस्त: तीन दिन से अंधेरे में लाखों लोग, पानी के लिए भी मचा हाहाकार

बरेली में बिजली संकट से जनजीवन अस्त-व्यस्त: तीन दिन से अंधेरे में लाखों लोग, पानी के लिए भी मचा हाहाकार
आंधी-बारिश के बाद बिजली व्यवस्था ध्वस्त, उपकेंद्रों पर फूटा लोगों का गुस्सा
बरेली। आंधी और बारिश के बाद बरेली की बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जिले के कई शहरी और ग्रामीण इलाकों में पिछले तीन दिनों से बिजली आपूर्ति बाधित है, जिससे लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। भीषण गर्मी के बीच बिजली संकट के कारण पेयजल आपूर्ति भी ठप हो गई है और लोगों को पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि शुक्रवार को गुस्साए उपभोक्ताओं ने रामगंगानगर, डीडीपुरम, सीबीगंज और अन्य उपकेंद्रों का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। कई जगहों पर अधिकारियों और कर्मचारियों को लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ा।
रामगंगानगर में 25 हजार आबादी पर संकट
रामगंगानगर फीडर से जुड़े क्षेत्रों में लगातार तीसरे दिन भी बिजली आपूर्ति सामान्य नहीं हो सकी। सेक्टर-4 सहित कई मोहल्लों में लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। बिजली न होने से पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई, जिसके चलते हजारों परिवारों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
रात होते-होते लोगों का सब्र जवाब दे गया और बड़ी संख्या में उपभोक्ता उपकेंद्र पहुंच गए। नाराज लोगों ने बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उपकेंद्र का घेराव कर दिया। मौके पर पहुंचे मुख्य अभियंता ज्ञान प्रकाश ने लोगों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन देर रात तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रही।
लाइनमैन की कमी बनी बड़ी समस्या
डीडीपुरम उपकेंद्र पर भी उपभोक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद समय पर फॉल्ट ठीक नहीं किए जा रहे हैं। वहीं विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि लाइनमैन और तकनीकी स्टाफ की भारी कमी के कारण मरम्मत कार्य प्रभावित हो रहा है।
विद्युत अधिकारियों के अनुसार कई स्थानों पर स्थानीय फॉल्ट, टूटे खंभे और क्षतिग्रस्त लाइनों को ठीक करने का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है।
दो लाख से अधिक लोग प्रभावित
राजेंद्रनगर, सुरेश शर्मा नगर, कृष्णा नगर फेज-2, पवन विहार, सनराइज कॉलोनी, कौशांबी एन्क्लेव और अन्य कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित रहने से करीब दो लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। घरों में इन्वर्टर जवाब दे चुके हैं, मोबाइल फोन डिस्चार्ज हो चुके हैं और पेयजल संकट ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
आंधी ने पहुंचाया दो करोड़ से अधिक का नुकसान
विद्युत विभाग के प्रारंभिक आकलन के अनुसार हालिया आंधी और बारिश से जिले में करीब दो करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक—
– 500 से अधिक बिजली खंभे क्षतिग्रस्त
– 30 ट्रांसफार्मर प्रभावित
– 200 से अधिक पेड़ बिजली लाइनों पर गिरे
– दर्जनों फीडर और हाईटेंशन लाइनें बाधित
सबसे अधिक नुकसान सीबीगंज, परसाखेड़ा, दोहना और आसपास के क्षेत्रों में दर्ज किया गया है।
ग्रामीण इलाकों में हालात और गंभीर
शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी हालात बेहद खराब हैं। फतेहगंज पश्चिमी क्षेत्र के लगभग 250 गांव पिछले तीन दिनों से बिजली संकट झेल रहे हैं। आंधी में दर्जनों खंभे टूटने और लाइनों पर पेड़ गिरने से आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि उद्योगों और बड़े उपभोक्ताओं की लाइनें पहले ठीक कर दी गईं, जबकि गांवों की समस्या को नजरअंदाज किया गया। सीबीगंज के मथुरापुर गांव में लोगों ने बिजली न आने पर उपकेंद्र का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया।
विभाग का दावा, युद्धस्तर पर चल रहा काम
मुख्य अभियंता ज्ञान प्रकाश ने बताया कि जिले में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है और मरम्मत कार्य लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त खंभों, ट्रांसफार्मरों और लाइनों को बदलने का काम तेजी से किया जा रहा है।
वहीं फतेहगंज पश्चिमी क्षेत्र के एसडीओ अंकित द्विवेदी ने बताया कि 20 से अधिक खंभे टूटने के कारण मरम्मत में समय लग रहा है। मौसम अनुकूल रहा तो जल्द ही सभी क्षेत्रों में आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी।
जनता का सवाल: आखिर कब मिलेगी राहत?
तीन दिन से अंधेरे और जल संकट का सामना कर रहे लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि हर बार आंधी-बारिश के बाद बिजली व्यवस्था क्यों ध्वस्त हो जाती है। शहर से लेकर गांव तक लोग स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल विद्युत विभाग की टीमें लगातार मरम्मत कार्य में जुटी हैं, लेकिन बरेली के लाखों उपभोक्ताओं को अब भी बिजली और पानी की बहाली का इंतजार है।






