खाद के लिए किसानों की परेशानी बरकरार, जबरन पेस्टिसाइड बेचने का आरोप
बिथरी चैनपुर क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान किसानों ने एआर कोऑपरेटिव के सामने बयां किया दर्द

बरेली। खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच एक बार फिर किसानों को खाद के लिए मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है। जनपद बरेली की तहसील सदर के विकासखंड बिथरी चैनपुर क्षेत्र में किसानों ने खाद वितरण व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। सहकारी समितियों के निरीक्षण पर पहुंचे एआर कोऑपरेटिव, बरेली के समक्ष किसानों ने अपनी समस्या रखते हुए बताया कि कई निजी खाद एवं पेस्टिसाइड विक्रेता खाद देने से पहले जबरन कीटनाशक एवं अन्य दवाइयां खरीदने का दबाव बना रहे हैं।
किसानों का कहना है कि खेती-किसानी पहले ही महंगी हो चुकी है। ऐसे में बजट सीमित होने के बावजूद उन्हें जरूरत से ज्यादा पेस्टिसाइड खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। किसानों ने बताया कि यदि वे अतिरिक्त दवाइयां नहीं खरीदते हैं तो कई दुकानदार उन्हें खाद देने में आनाकानी करते हैं।
एक किसान ने निरीक्षण के दौरान कहा, “साहब, हमें सिर्फ खाद चाहिए, लेकिन दुकानदार पहले पेस्टिसाइड और दूसरी दवाइयां खरीदने को कहते हैं। मजबूरी में हमें अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।”
एआर कोऑपरेटिव ने किसानों को दी शिकायत की सलाह
निरीक्षण के दौरान किसानों की शिकायत सुनने के बाद एआर कोऑपरेटिव, बरेली ने स्पष्ट किया कि सहकारी समितियों पर खाद की पर्याप्त उपलब्धता है और वहां किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि जबरन पेस्टिसाइड बेचने की शिकायतें मुख्य रूप से निजी दुकानों से संबंधित हैं।
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि यदि कोई निजी विक्रेता खाद के साथ अनावश्यक दवाइयां खरीदने का दबाव बनाता है तो इसकी शिकायत जिला कृषि अधिकारी एवं जिलाधिकारी से की जा सकती है। शिकायत मिलने पर संबंधित दुकानदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
किसानों ने की सख्त कार्रवाई की मांग
किसानों का कहना है कि प्रशासन को ऐसे निजी विक्रेताओं के खिलाफ अभियान चलाकर जांच करनी चाहिए, ताकि किसानों का आर्थिक शोषण रोका जा सके। किसानों ने मांग की है कि खाद की बिक्री को पारदर्शी बनाया जाए और किसी भी प्रकार की जबरन बिक्री पर कठोर कार्रवाई की जाए।
खरीफ सीजन के दौरान खाद की मांग बढ़ने के साथ ही यह मुद्दा किसानों के लिए बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन किसानों की शिकायतों पर क्या कदम उठाता है।
रिपोर्ट: देवेंद्र पटेल
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