बरेली में डीसीएम में ठूंसी गईं 25 गायें, एक की मौत; गोरक्षकों का हंगामा

रिपोर्ट: लाइव भारत टीवी / देवेंद्र पटेल
स्थान: बरेली (उत्तर प्रदेश)
बरेली। जिले के बिथरी चैनपुर ब्लॉक से पशु परिवहन में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम पंचायत नरियावल से दासपुर स्थित बड़ी गोशाला में स्थानांतरित की जा रही गायों के साथ कथित रूप से अमानवीय व्यवहार किया गया, जिसके चलते एक गाय की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गईं।
जानकारी के अनुसार, कुल 25 गायों को एक ही डीसीएम वाहन में भरकर ले जाया जा रहा था। आरोप है कि परिवहन के दौरान निर्धारित मानकों की अनदेखी की गई और पशुओं को अत्यधिक भीड़भाड़ में ठूंस दिया गया। इसी वजह से दम घुटने और दबाव के कारण एक गाय की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अन्य गायों की हालत भी खराब बताई जा रही है।
🔴 शिफ्टिंग के दौरान सामने आई लापरवाही
यह पूरा मामला उस समय उजागर हुआ जब छोटी गोशाला से बड़ी गोशाला में पशुओं को शिफ्ट किया जा रहा था। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, यदि परिवहन के दौरान नियमों का पालन किया जाता और गायों को अलग-अलग वाहनों में सुरक्षित तरीके से ले जाया जाता, तो इस तरह की घटना से बचा जा सकता था।
घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और स्थानीय लोगों में भी आक्रोश देखने को मिला।
🟠 गोरक्षकों का विरोध, कार्रवाई की मांग
घटना की सूचना मिलते ही हिंदू संगठन और गोरक्षक दल के कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए। गोरक्षक हिमांशु पटेल और अजय पटेल ने अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंचकर नाराजगी जताई और इसे “अमानवीय लापरवाही” करार दिया।
गोरक्षकों ने आरोप लगाया कि जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों ने जानबूझकर नियमों की अनदेखी की, जिसके चलते यह हादसा हुआ। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।
🔵 मौके पर संभाली स्थिति, घायल पशुओं को पहुंचाया सुरक्षित
आक्रोश के बीच गोरक्षक दल ने मौके पर स्थिति को संभालते हुए गायों को सुरक्षित तरीके से दासपुर स्थित गोशाला तक पहुंचाने की व्यवस्था कराई। इस दौरान घायल गायों के उपचार और उनकी हालत को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई।
⚖️ प्रशासन पर उठे सवाल
इस घटना के बाद गोशालाओं के संचालन और पशु परिवहन व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक निगरानी की कमी और लापरवाही के कारण इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं।
अब देखना होगा कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह समय के साथ ठंडा पड़ जाता है।
फिलहाल, इस घटना ने पशु सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों को लेकर बहस तेज कर दी है।






