20 करोड़ के जीएसटी फ्रॉड का मास्टरमाइंड गाजियाबाद से गिरफ्तार, फर्जी फर्मों के राष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश

बरेली बिथरी चैनपुर पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने करोड़ों रुपये के जीएसटी फ्रॉड का मास्टरमाइंड मेरठ निवासी योगेश शर्मा को गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर लगभग 20 करोड़ रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का फर्जी दावा करने का आरोप है।
फर्जी फर्म और दस्तावेजों का खेल
जांच में सामने आया कि गिरोह खाली ट्रकों और नकली कागजों के सहारे माल की सप्लाई दिखाता था, जबकि वास्तविक लेनदेन कहीं नहीं होता था। योगेश ने अपने साथियों मनीष अग्रवाल, गौरव अग्रवाल (बरेली निवासी), अपर्णा अग्रवाल और आदी उर्फ युगांश बिसारिया के साथ मिलकर बरेली में ‘श्री श्याम ट्रेडर्स’ नाम की फर्जी फर्म बनाई थी। सिर्फ इसी फर्म से करीब 14 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा सरकार को पहुंचाया गया।
गिरफ्तारी और बरामदगी
पुलिस ने योगेश को गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित केडीपी सवाना अपार्टमेंट से गिरफ्तार किया। उसके पास से बरामद मोबाइल फोन में भारी मात्रा में फर्जी इनवॉइस, ई-वे बिल और व्हाट्सएप चैट मिली हैं। चैट से पता चला कि गिरोह ने देशभर में फर्जी फर्मों का जाल फैला रखा था। मोबाइल डेटा इतना अधिक है कि पुलिस इसका फॉरेंसिक टेस्ट कराने की तैयारी कर रही है।
गिरोह का तरीका
- दस्तावेजों में माल की सप्लाई दिखाना, जबकि ट्रक खाली चलते थे।
- किराये की दुकानों पर फर्जी रजिस्ट्रेशन कराना और कुछ समय बाद पता बदल देना।
- नकदी और फर्जी लेनदेन के पैसों को ठिकाने लगाने के लिए हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल करना।
पुलिस की कार्रवाई
इस मामले में पहले ही गिरोह के सदस्य गौरव अग्रवाल को 25 जनवरी को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। अब योगेश की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अन्य सहयोगियों और हवाला कारोबारियों की तलाश में जुट गई है।
एसएसपी का बयान
एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल डेटा और हवाला इनपुट की जांच से स्पष्ट हुआ है कि यह गिरोह कई जिलों और राज्यों में फर्जी कंपनियों के माध्यम से जीएसटी में भारी धोखाधड़ी कर रहा था। योगेश की गिरफ्तारी से इस नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। जांच एजेंसियों का लक्ष्य ऐसे संगठित आर्थिक अपराधों को जड़ से खत्म करना है।






