बरेली में गैस सिलेंडर की कालाबाजारी से हाहाकार, महीनों से सप्लाई ठप

रिपोर्ट: लाइव भारत टीवी / देवेंद्र पटेल, बरेली
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में रसोई गैस की किल्लत ने आम लोगों की परेशानियों को चरम पर पहुंचा दिया है। गैस सिलेंडर की बढ़ती कालाबाजारी और आपूर्ति व्यवस्था में गड़बड़ी के चलते उपभोक्ताओं को महीनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। सरकारी स्तर पर निगरानी के दावों के बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
स्थानीय उपभोक्ताओं का आरोप है कि कुछ गैस एजेंसियां खुलेआम नियमों की अनदेखी कर रही हैं। समय पर गैस सिलेंडर की डिलीवरी नहीं दी जा रही, जबकि दूसरी तरफ ब्लैक मार्केटिंग के जरिए सिलेंडरों की अवैध बिक्री जारी है। इससे आम परिवारों के लिए रोजमर्रा का खाना बनाना भी मुश्किल हो गया है।
स्थिति यह बन गई है कि लोग एक-एक महीने पहले गैस बुकिंग करा रहे हैं, लेकिन उसके बाद भी उन्हें समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा। कई उपभोक्ताओं ने बताया कि बुकिंग के बावजूद डिलीवरी में लगातार देरी हो रही है, जिससे उनकी दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
इस पूरे मामले में प्रशासनिक लापरवाही भी सामने आई है। जब जिला आपूर्ति अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या को लेकर संवेदनशील है या नहीं। जनता की शिकायतों पर कोई ठोस प्रतिक्रिया न मिलना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
इसी बीच, एक पीड़ित उपभोक्ता ईश्वरी प्रसाद शर्मा (उपभोक्ता संख्या: 7598571013) ने अपनी आपबीती साझा की। उन्होंने बताया कि उन्होंने 7 अप्रैल 2026 को गैस सिलेंडर के लिए बुकिंग कराई थी, लेकिन अब तक उन्हें डिलीवरी नहीं मिली। उनका आरोप है कि मार्च महीने की बुकिंग एजेंसी द्वारा खुद कर ली गई और उस सिलेंडर को ब्लैक में बेच दिया गया।
ईश्वरी प्रसाद शर्मा ने यह भी दावा किया कि उन्हें फरवरी महीने से अब तक गैस की सप्लाई नहीं मिली है। ऐसे में उनके परिवार को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि एजेंसी की इस तरह की मनमानी के खिलाफ कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
यह पूरा मामला बरेली के गणेश नगर स्थित शकुन्ता इंडेन गैस एजेंसी से जुड़ा बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस एजेंसी के खिलाफ पहले भी शिकायतें सामने आ चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई है। इससे एजेंसी संचालकों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।
गैस की इस किल्लत का सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है। महंगाई के इस दौर में जहां पहले से ही खर्च बढ़े हुए हैं, वहीं गैस सिलेंडर की अनुपलब्धता ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। कई परिवार अब लकड़ी या अन्य वैकल्पिक साधनों से खाना बनाने को मजबूर हो रहे हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि गैस एजेंसियों की जांच कराई जाए और कालाबाजारी में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेकर कोई ठोस कदम उठाएगा, या फिर उपभोक्ताओं को इसी तरह परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। फिलहाल, बरेली के लोगों को गैस सिलेंडर के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, जो प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।






