UP पंचायत चुनाव : हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्ति पर रोक, सरकार को नोटिस
इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ग्राम प्रधान नहीं बनेंगे प्रशासक!

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव से पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए ग्राम पंचायतों में कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने प्रथम दृष्टया इस व्यवस्था को संविधान की भावना के विपरीत माना है और सरकार के निर्णय पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
यह महत्वपूर्ण आदेश न्यायमूर्ति की पीठ ने अरविंद राठौर द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिका में राज्य सरकार के उस निर्णय को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी उन्हें संबंधित ग्राम पंचायत का प्रशासक बनाकर प्रशासनिक अधिकार दिए जाने का प्रावधान किया गया था।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह व्यवस्था संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप प्रतीत नहीं होती। इसी आधार पर अदालत ने सरकार के आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।
इस फैसले के बाद प्रदेश की हजारों ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर नई स्थिति उत्पन्न हो गई है। अब यह सवाल उठने लगे हैं कि पंचायतों का संचालन किस व्यवस्था के तहत होगा और आगामी पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।
मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को निर्धारित की गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार हाईकोर्ट में अपना पक्ष किस प्रकार रखती है और क्या इस आदेश को चुनौती देने के लिए आगे की कानूनी कार्रवाई करती है।
फिलहाल हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश ने उत्तर प्रदेश की पंचायत व्यवस्था और आगामी पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच नई कानूनी बहस छेड़ दी है।






