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Bareilly News: निजी स्कूलों की मनमानी पर प्रशासन सख्त! 7.5% से अधिक फीस बढ़ाने वाले विद्यालयों की जांच शुरू

10 से 20 प्रतिशत तक फीस बढ़ाने के आरोप, शिकायतों पर सक्रिय हुई जिला शुल्क समिति; दोषी पाए जाने पर होगी कार्रवाई

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रिपोर्ट: देवेंद्र पटेल | बरेली

बरेली। नए शैक्षिक सत्र में निजी विद्यालयों द्वारा मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने के मामलों को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। जिले के कई निजी स्कूलों पर निर्धारित सीमा से अधिक शुल्क वृद्धि करने के आरोप लगे हैं। शिकायतें मिलने के बाद जिला शुल्क समिति सक्रिय हो गई है और संबंधित विद्यालयों की जांच शुरू कर दी गई है। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन पाया गया तो संबंधित विद्यालयों को नोटिस जारी कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. अजीत कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) नियमों के अनुसार निजी विद्यालय फीस में अधिकतम 7.5 प्रतिशत तक ही वृद्धि कर सकते हैं। शुल्क वृद्धि की यह सीमा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में पांच प्रतिशत जोड़कर निर्धारित की जाती है। इसके बावजूद जिले के कुछ विद्यालयों द्वारा 10 से 20 प्रतिशत तक फीस बढ़ाने की शिकायतें सामने आई हैं, जिनकी जांच कराई जा रही है।

उन्होंने बताया कि एक विद्यालय के खिलाफ प्राप्त शिकायत की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है। यदि जांच में निर्धारित सीमा से अधिक फीस वसूले जाने की पुष्टि होती है तो विद्यालय प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। संतोषजनक जवाब न मिलने पर जिला शुल्क समिति नियमानुसार आगे की कार्रवाई करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में मिलने वाली प्रत्येक शिकायत पर निष्पक्ष जांच कर सख्त कदम उठाए जाएंगे।

सूत्रों के अनुसार, कई अभिभावक अधिक फीस वसूले जाने से परेशान हैं, लेकिन बच्चों के भविष्य और विद्यालय प्रबंधन के दबाव के कारण खुलकर शिकायत दर्ज कराने से बच रहे हैं। इसी वजह से कई मामलों में अभिभावकों की शिकायतें सामने नहीं आ पातीं।

रुहेलखंड अभिभावक सेवा समिति के प्रदेश महामंत्री विशाल मेहरोत्रा ने बताया कि 25 अप्रैल को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई जिला शुल्क समिति की बैठक में भी निर्धारित सीमा से अधिक फीस वृद्धि का मुद्दा उठाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले के कुछ बड़े निजी विद्यालय नियमों की अनदेखी कर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहे हैं। ऐसे विद्यालयों की निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

वहीं शिक्षक अभिभावक संघ के अध्यक्ष अंकुर सक्सेना ने कहा कि हर वर्ष नए सत्र की शुरुआत में फीस वृद्धि को लेकर बड़ी संख्या में शिकायतें आती हैं। किसी भी विद्यालय को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता। यदि कोई संस्थान निर्धारित सीमा से अधिक शुल्क वसूल रहा है तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके।

उधर बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. विनीता ने बताया कि बेसिक शिक्षा विभाग को अभी तक शुल्क वृद्धि से संबंधित कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि यदि भविष्य में कोई मामला सामने आता है तो उसकी जांच कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्य बातें

– निजी विद्यालय अधिकतम 7.5% तक ही फीस बढ़ा सकते हैं।
– कई स्कूलों पर 10 से 20% तक शुल्क वृद्धि करने का आरोप।
– जिला शुल्क समिति ने शिकायतों की जांच शुरू की।
– दोषी पाए जाने पर नोटिस के बाद नियमानुसार कार्रवाई होगी।
– अभिभावक संगठनों ने मनमानी फीस वृद्धि पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।

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