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बरेली: PWD की सरकारी भूमि से यूकेलिप्टस के पेड़ों की कथित अवैध कटान, ग्रामीण ने SDM व पुलिस से की संयुक्त कार्रवाई की मांग

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रिपोर्ट: देवेंद्र पटेल, बरेली
बरेली। जनपद बरेली की तहसील सदर क्षेत्र के थाना बिथरी चैनपुर अंतर्गत ग्राम सैदपुर कुर्मीयान में लोक निर्माण विभाग (PWD) की सरकारी भूमि पर खड़े यूकेलिप्टस के पेड़ों की कथित रूप से अवैध कटान कर उन्हें बेचने का मामला सामने आया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद क्षेत्र में रोष व्याप्त है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग उठाई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि PWD की सरकारी भूमि पर वर्षों से खड़े यूकेलिप्टस के पेड़ों को बिना किसी सक्षम अनुमति के काटकर बेच दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है, बल्कि इससे पहले भी इसी सरकारी भूमि पर पेड़ काटने का प्रयास किया गया था। समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण अब दोबारा सरकारी संपत्ति को कथित रूप से नुकसान पहुंचाया गया है।
ग्रामीणों के अनुसार सरकारी भूमि और उस पर खड़े पेड़ों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित विभाग एवं प्रशासन की है। इसके बावजूद सरकारी संपत्ति से खुलेआम पेड़ों की कटान कई गंभीर सवाल खड़े करती है। लोगों का कहना है कि यदि संबंधित विभाग नियमित निगरानी करता तो इस प्रकार की घटना नहीं होती।
प्रशांत कुमार ने SDM व पुलिस की संयुक्त टीम से जांच की मांग की
इस पूरे मामले में गांव निवासी प्रशांत कुमार ने उप जिलाधिकारी (SDM) सदर एवं पुलिस प्रशासन को शिकायत देकर राजस्व विभाग, PWD और पुलिस की संयुक्त टीम से मौके पर जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकारी भूमि पर खड़े पेड़ों की कथित अवैध कटान कर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया है। उन्होंने दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करने तथा सरकारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
प्रशांत कुमार ने यह भी मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि यदि पेड़ों की कटान बिना वैध अनुमति के हुई है तो इसमें किन लोगों की भूमिका रही और किन अधिकारियों की लापरवाही से सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
प्रशासन पर उठ रहे सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकारी भूमि पर खड़े पेड़ आखिर किसकी मिलीभगत या लापरवाही से काटे गए? यदि बिना अनुमति सरकारी पेड़ों की कटान हुई है, तो संबंधित विभागों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। स्थानीय नागरिकों ने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध वन एवं पर्यावरण संरक्षण सहित अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी भूमि पर अवैध कटान और कब्जे की घटनाओं पर समय रहते सख्ती नहीं की गई तो भविष्य में अन्य सरकारी संपत्तियां भी असुरक्षित हो सकती हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि सरकारी भूमि पर अवैध गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाई जाए और दोषियों के खिलाफ उदाहरणात्मक कार्रवाई की जाए।
(नोट: इस समाचार में अवैध कटान और बिक्री से जुड़े तथ्य स्थानीय लोगों एवं शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित हैं। संबंधित विभाग या प्रशासन की आधिकारिक जांच एवं पुष्टि के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।)

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