बरेली की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की रफ्तार थमी, प्रशासक व्यवस्था के बाद बढ़ीं ग्रामीणों की शिकायतें

बरेली। जनपद की कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ने को लेकर ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। पंचायतों में प्रशासक व्यवस्था लागू होने के बाद ग्रामीणों का आरोप है कि विकास योजनाओं के क्रियान्वयन की गति पहले की तुलना में काफी कम हो गई है। नाली मरम्मत, सीसी रोड निर्माण, हैंडपंप एवं पेयजल व्यवस्था, साफ-सफाई और अन्य आवश्यक कार्यों में लगातार देरी होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि छोटी-छोटी जनसमस्याओं के समाधान के लिए कई बार ग्राम पंचायत, ब्लॉक कार्यालय और संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया गया, लेकिन हर बार “शासन से स्वीकृति नहीं मिली” या अन्य प्रशासनिक कारण बताकर कार्य टाल दिया जाता है। उनका आरोप है कि आवश्यक कार्य भी लंबे समय से लंबित पड़े हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार कई गांवों में नियमित साफ-सफाई नहीं हो रही है, क्षतिग्रस्त नालियों की मरम्मत नहीं कराई जा रही, नई सीसी सड़कों का निर्माण रुका हुआ है और पेयजल व्यवस्था से जुड़े कार्य भी समय पर पूरे नहीं हो रहे हैं। इससे बरसात के मौसम में ग्रामीणों की समस्याएं और बढ़ गई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्याओं को लेकर ब्लॉक प्रशासन, संबंधित अधिकारियों तथा मुख्यमंत्री जनसुनवाई (सीएम पोर्टल) पर भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में निराशा का माहौल है।
कुछ जनप्रतिनिधियों का भी कहना है कि यदि सभी विकास कार्य एक साथ संभव नहीं हैं तो कम से कम अत्यंत आवश्यक और जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देकर कराया जाना चाहिए, ताकि ग्रामीणों को तत्काल राहत मिल सके। उनका मानना है कि पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी पहल की आवश्यकता है।
विधानसभा चुनाव से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार राजनीतिक चर्चा का विषय भी बनती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार की योजनाओं की जानकारी तो लगातार दी जा रही है, लेकिन यदि जमीनी स्तर पर विकास कार्य समय पर नहीं हुए तो इसका असर जनता की धारणा पर पड़ सकता है।
हालांकि, इस संबंध में संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।





