Bareilly News: कान्हा उपवन में 4 गोवंश की मौत, पोस्टमार्टम में पेट से निकली करीब 350 किलो पॉलीथिन-प्लास्टिक।

गोशाला की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल; बीमार गोवंश की मौत के बाद हंगामा, नगर निगम का दावा—सड़कों से बीमार हालत में लाए गए थे पशु, अब पॉलीथिन के खिलाफ तेज होगा अभियान
बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली में गोवंश संरक्षण और उनकी देखभाल की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सीबीगंज स्थित कान्हा उपवन गोशाला में चार गोवंश की मौत हो गई। नगर निगम के अनुसार डॉक्टरों के पैनल से कराए गए पोस्टमार्टम में चारों गोवंश के पेट से कुल करीब 350 किलो पॉलीथिन और प्लास्टिक के टुकड़े निकले। इस घटना के बाद जहां प्रतिबंधित पॉलीथिन के इस्तेमाल और सड़कों पर फेंके जा रहे प्लास्टिक कचरे को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं, वहीं गोशाला में पशुओं की निगरानी और चिकित्सा व्यवस्था को लेकर भी स्थानीय लोगों ने आरोप लगाए हैं।
27 अगस्त को गोशाला लाए गए थे चार बीमार गोवंश
नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी के मुताबिक, शहर से पकड़े गए चार बीमार गोवंश को 27 अगस्त को कान्हा उपवन गोशाला लाकर संरक्षित किया गया था। 29 अगस्त की सुबह चारों की मौत हो गई। इसके बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए नगर निगम की ट्रैक्टर-ट्रॉली से ले जाने की तैयारी की गई।
बताया गया कि इसी दौरान रास्ते में कुछ लोगों ने ट्रॉली रोक दी और चालक से चाबी छीनकर चले गए। बाद में कान्हा उपवन के मुख्य द्वार पर भी हंगामा हुआ। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाकर स्थिति शांत कराई।
डॉक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमार्टम, वीडियोग्राफी भी कराई
चारों गोवंश का डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी कराई गई। नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी के अनुसार, पोस्टमार्टम में चारों पशुओं के पेट से मिलाकर करीब 350 किलो पॉलीथिन और प्लास्टिक के टुकड़े मिले। अधिकारी का कहना है कि पॉलीथिन और प्लास्टिक खाने के कारण पशु गंभीर रूप से बीमार हुए और उनकी मौत हो गई।
सवाल—सड़कों पर गोवंश तक कैसे पहुंच रहा इतना प्लास्टिक?
यह मामला केवल चार गोवंश की मौत तक सीमित नहीं है। इतनी बड़ी मात्रा में पॉलीथिन और प्लास्टिक मिलने से शहर की कचरा प्रबंधन व्यवस्था और प्रतिबंधित पॉलीथिन के इस्तेमाल पर भी सवाल खड़े होते हैं। सड़कों पर घूमने वाले निराश्रित पशु यदि कूड़े के ढेर से भोजन तलाशते हुए लगातार प्लास्टिक निगल रहे हैं तो उनके गोशाला पहुंचने तक गंभीर रूप से बीमार होने का खतरा बना रहेगा।
इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि बीमार अवस्था में गोशाला पहुंचने वाले गोवंश की स्वास्थ्य जांच, उपचार और लगातार निगरानी की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। पशु चिकित्सा अधिकारियों और गोशाला संचालन से जुड़ी कार्यदायी व्यवस्था की भूमिका की भी निष्पक्ष समीक्षा किए जाने की मांग उठ सकती है।
चारे की कमी के आरोप, नगर निगम ने जारी किए अपने आंकड़े
गोवंश की मौत के बाद कुछ लोगों ने गोशाला में चारा और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर आरोप लगाए। हालांकि नगर निगम की ओर से दिए गए आंकड़ों के मुताबिक कान्हा उपवन में करीब 1400 गोवंश संरक्षित हैं। गोशाला की पूर्व क्षमता 1200 पशुओं की थी, जिसे बढ़ाकर 1400 किया गया है।
नगर निगम के अनुसार, गोवंश के भरण-पोषण के लिए प्रतिदिन करीब 57 क्विंटल हरा चारा, 95 क्विंटल भूसा और 19 क्विंटल चोकर उपलब्ध कराया जाता है। प्रत्येक गोवंश को औसतन पांच किलो भूसा, तीन किलो हरा चारा और एक किलो चोकर देने की व्यवस्था बताई गई है।
14 शेड, 10 सबमर्सिबल; फिर भी निगरानी पर सवाल
कान्हा उपवन में गोवंश के लिए 14 शेड होने की बात कही गई है और अतिरिक्त शेड का निर्माण चल रहा है। प्रत्येक शेड में खाने और स्वच्छ पानी के लिए नाद की व्यवस्था है। पानी की आपूर्ति के लिए 10 सबमर्सिबल लगाए गए हैं।
इन दावों के बावजूद एक साथ चार गोवंश की मौत ने पशुओं की चिकित्सा निगरानी और बीमार पशुओं के उपचार की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह जांच का विषय है कि चारों गोवंश गोशाला पहुंचने के समय कितनी गंभीर स्थिति में थे, उनका क्या उपचार किया गया और उन्हें बचाने के लिए कौन-कौन से चिकित्सकीय कदम उठाए गए।
पॉलीथिन के खिलाफ अभियान तेज करने की तैयारी
चार गोवंश के पेट से बड़ी मात्रा में पॉलीथिन और प्लास्टिक मिलने के बाद नगर निगम अब शहर में पॉलीथिन के खिलाफ अभियान तेज करने की तैयारी कर रहा है। यह घटना इस बात की चेतावनी भी है कि सड़कों और खुले स्थानों पर फेंका जाने वाला प्लास्टिक कचरा निराश्रित पशुओं के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
बड़ा सवाल यह है कि गोवंश संरक्षण के लिए संसाधन और व्यवस्थाएं मौजूद होने के बावजूद बीमार पशुओं की समय रहते पहचान, उपचार और प्रभावी निगरानी कैसे सुनिश्चित होगी? साथ ही शहर की सड़कों पर गोवंश को प्लास्टिक खाने की नौबत क्यों आ रही है और इसके लिए जवाबदेही किसकी तय होगी?
रिपोर्ट: देवेंद्र पटेल | Live Bharat TV | बरेली, उत्तर प्रदेश




