मौत का मातम और सर्द हवाओं की मार, पोस्टमार्टम हाउस बना पीड़ा स्थल

बरेली। जनपद में शीतलहर और कड़ाके की ठंड ने जहां आम जनजीवन को बेहाल कर रखा है, वहीं कोतवाली स्थित पोस्टमार्टम हाउस पर हालात कहीं ज्यादा अमानवीय नजर आए। यहां अपनों की मौत का गम झेल रहे परिजन खुले आसमान के नीचे घंटों ठंड में बैठने को मजबूर हैं, क्योंकि ठंड से बचाव के लिए अलाव जैसी बुनियादी व्यवस्था तक नदारद है।
गम के साथ ठंड की दोहरी यातना
पोस्टमार्टम हाउस पर रोजाना दूर-दराज से मृतकों के परिजन पहुंचते हैं। कई-कई घंटे, कभी पूरी रात तक उन्हें शव मिलने का इंतजार करना पड़ता है। एक तरफ अपनों को खोने का असहनीय दुख, दूसरी ओर सर्द हवाओं और कोहरे की चुभन यह दृश्य प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर करता है। सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और मासूम बच्चों को हो रही है, जो ठंड में ठिठुरते नजर आते हैं।
हर साल होता था इंतजाम, इस बार क्यों चूक?
पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारियों के मुताबिक हर वर्ष सर्दियों में नगर निगम की ओर से अलाव के लिए लकड़ी की व्यवस्था की जाती थी। लेकिन साल 2025-26 की सर्दियों में कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद कोई इंतजाम नहीं कराया गया। नतीजा यह कि कर्मचारी हों या परिजन सभी ठंड से जूझने को मजबूर हैं।
जिम्मेदार विभाग बेखबर, बढ़ता आक्रोश
मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल अलाव और अन्य ठंड से बचाव के इंतजाम की मांग की है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
शीतलहर के बीच व्यवस्थाओं की अनदेखी से लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी और आक्रोश साफ झलक रहा है।
संवेदनशील स्थल पर लापरवाही शर्मनाक
पोस्टमार्टम हाउस जैसे संवेदनशील स्थान पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। सबसे बड़ा सवाल यही है, क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
अब देखना यह होगा कि खबर सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी कब तक नींद से जागते हैं।





