डी फार्मा के नाम पर करोड़ों का खेल, फर्जी डिग्रियां थमा कर युवाओं से ठगी

बरेली। डी फार्मा कोर्स के नाम पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। बिथरी चैनपुर थाना क्षेत्र के गांव पदारथपुर निवासी माजिद अली खान ने मुजफ्फरनगर स्थित बाबा इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी के प्रबंधन पर फर्जी डिग्री देने और लाखों रुपये की ठगी करने का आरोप लगाया है।
माजिद के अनुसार वर्ष 2022 में उसकी मुलाकात इंस्टीट्यूट के प्रबंधक इमलाख खान, चेयरमैन इमरान खान और आरिफ खान से हुई थी। आरोप है कि इन लोगों ने डी फार्मा कोर्स “आसानी से” कराने का झांसा दिया और दो वर्षीय कोर्स का खर्च 3.80 लाख रुपये तय किया।
आठ छात्रों से वसूली जाती रही फीस
माजिद के झांसे में आने के बाद उसके साथ अन्य सात युवकों ने भी प्रवेश लिया। आरोप है कि आरोपियों ने सभी से शैक्षिक प्रमाण पत्र जमा कराए और दो साल तक लगातार फीस वसूलते रहे। कुछ छात्रों की तो परीक्षा तक नहीं कराई गई, इसके बावजूद कोर्स पूरा होने पर सभी को डी फार्मा की डिग्री थमा दी गई।
फार्मेसी काउंसिल में खुली पोल
जब पीड़ितों ने फार्मेसी काउंसिल में पंजीकरण के लिए आवेदन किया तो डिग्री को फर्जी बताया गया। इसके बाद जब पीड़ित छात्रों ने कॉलेज प्रबंधन से संपर्क किया तो आरोप है कि राजनीतिक रसूख का हवाला देते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई।
इन छात्रों को बनाया गया शिकार
भगवान सिंह (बिलौरी, आंवला), कामरान (धंतिया, फतेहगंज पश्चिमी), रितिक, सचिन, मुकेश (महादेवपुरम, बहेड़ी), सुरेश पाल (मकरंदपुर, जैतीपुर, शाहजहांपुर), रिपन विश्वास (नवीनगर, कैंट), अशोक कुमार (करमपुर चौधरी, इज्जतनगर)
बरेली में पहले भी हो चुका है 600 करोड़ का फर्जीवाड़ा
फार्मेसी कोर्स के नाम पर ठगी का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले बरेली में बी फार्मा और डी फार्मा के नाम पर करीब 600 करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा हो चुका है। खुसरो इंस्टीट्यूट के चेयरमैन शेर अली जाफरी, उसके बेटे और अन्य गुर्गों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। सभी आरोपी जेल भी गए, लेकिन बाद में जमानत पर बाहर आ गए।
ठगी के बड़े आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर
सैकड़ों करोड़ की ठगी के आरोपी रूप किशोर गोला जमानत पर बाहर है। 500 करोड़ की ठगी के आरोपी सूर्यकांत और शशिकांत मौर्य पर 50-50 हजार रुपये का इनाम घोषित है, लेकिन अब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। कैनविज के निदेशक कन्हैया लाल गुलाटी के खिलाफ 35 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। एसआईटी जांच के बावजूद उसकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।






