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उत्तरप्रदेशबरेली

पुराने आंकड़ों से तय होंगी सीटें, बदलेंगे पंचायत चुनावी समीकरण

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बरेली। आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण की व्यवस्था इस बार अलग तस्वीर पेश करेगी। यह पहला मौका होगा जब एक ही जनगणना के आंकड़ों के आधार पर पंचायतों का आरक्षण तीसरी बार लागू किया जाएगा। इससे पहले किसी भी जनगणना पर अधिकतम दो बार ही आरक्षण लागू हुआ था।

दरअसल, वर्ष 2021 में कोरोना महामारी के कारण जनगणना नहीं हो सकी थी। ऐसे में सरकार को 2011 की जनगणना को ही आधार बनाकर वर्ष 2026 के पंचायत चुनाव में आरक्षण लागू करना पड़ेगा। इसका सीधा असर यह होगा कि कई पंचायतों में उन वर्गों को भी आरक्षण का लाभ मिल सकता है, जिनकी वर्तमान आबादी अब काफी कम हो चुकी है।
पुरानी जनगणना पर नया चुनाव

पंचायतीराज व्यवस्था में आरक्षण का नियम वर्ष 1995 से लागू है। इसके तहत ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य व प्रमुख, तथा जिला पंचायत अध्यक्ष और सदस्य पदों पर आरक्षण की व्यवस्था लागू रहती है।
आरक्षण का अनुपात तय है—
पिछड़ा वर्ग: 27 प्रतिशत
अनुसूचित जाति: 21 प्रतिशत
अनुसूचित जनजाति: 2 प्रतिशत

इसके साथ ही सभी वर्गों के आरक्षित पदों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है। इस तरह पंचायतों में आरक्षण केवल वर्गीय नहीं, बल्कि लिंग आधारित भी है।

इतिहास बताता है आरक्षण की पुनरावृत्ति

यदि पिछले चुनावों पर नजर डालें तो—
1991 की जनगणना पर 2000 का चुनाव,
2001 की जनगणना पर 2005 और 2010,
2011 की जनगणना पर 2015 और 2021 के चुनाव हुए।

अब 2021 में जनगणना न होने के कारण 2026 के चुनाव में भी 2011 के ही आंकड़े लागू होंगे। इससे आबादी में हुए बदलाव का आरक्षण पर कोई असर नहीं पड़ेगा और सीटों का बंटवारा पुराने प्रतिशत के आधार पर ही किया जाएगा।

प्रधान और बीडीसी पदों की संख्या में होगा बदलाव

वर्ष 2021 में जिले में

1193 ग्राम प्रधान,

14,921 ग्राम पंचायत सदस्य,

1,467 क्षेत्र पंचायत सदस्य,

15 क्षेत्र पंचायत प्रमुख

और 60 जिला पंचायत सदस्य चुने गए थे।

परिसीमन के बाद वर्ष 2026 के पंचायत चुनाव में यह संख्या कुछ घटेगी। अब चुनाव में

1,188 ग्राम प्रधान,

14,865 ग्राम पंचायत सदस्य,

1,460 क्षेत्र पंचायत सदस्य,

15 क्षेत्र पंचायत प्रमुख

और 60 जिला पंचायत सदस्य शामिल होंगे।

आरक्षण का निर्धारण इस बार भी पुराने प्रतिशत के अनुसार ही किया जाएगा।

 

बदलते समीकरण, नए अवसर

पुराने आंकड़ों के आधार पर आरक्षण लागू होने से चुनावी समीकरण बदलेंगे। कुछ क्षेत्रों में नए उम्मीदवारों के लिए अवसर खुलेंगे, जबकि कई जगह पुराने समीकरण ही कायम रहेंगे। पंचायत चुनाव में इस बार आरक्षण सबसे अहम और निर्णायक भूमिका निभाने वाला है।

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