ज़हरीले धुएं में घुटता गांव भवनपुर न्यायतुल्लाह, अवैध ईंट-भट्ठे पर कार्रवाई की मांग

बरेली। जिले के ग्रामीण इलाकों में बढ़ते वायु प्रदूषण ने लोगों की सांसें छीननी शुरू कर दी हैं। थाना भुता क्षेत्र के गांव भवनपुर न्यायतुल्लाह, तहसील फरीदपुर में तहसीनी ब्रिक फील्ड के नाम से अवैध रूप से संचालित ईंट-भट्ठा ग्रामीणों के लिए गंभीर संकट बन गया है। भट्ठे से निकलने वाला जहरीला धुआं न केवल गांव की हवा को दूषित कर रहा है, बल्कि मंदिर, मस्जिद, सरकारी स्कूल और डिग्री कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डाल रहा है।
केमिकल से पकाई जा रही ईंटें, पर्यावरण को भारी नुकसान
ग्रामीणों का आरोप है कि भट्ठा संचालक द्वारा पर्यावरण नियमों की खुली अनदेखी करते हुए ईंट पकाने में तरह-तरह के केमिकल, तुरी, चमड़ा और अन्य हानिकारक पदार्थों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे निकलने वाला जहरीला धुआं आसपास के इलाकों में फैलकर पक्षी, पशु और वनस्पतियों के लिए भी खतरा बन चुका है।
55 से अधिक गांवों की हवा हुई ज़हरील
जिले में मानकों के विपरीत संचालित सैकड़ों ईंट-भट्ठे वायु प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों के अनुसार हर ईंट-भट्ठे के लिए पर्यावरण स्वीकृति (एनओसी) अनिवार्य है, लेकिन इसके बावजूद जिले में सैकड़ों भट्ठे बिना एनओसी के धड़ल्ले से चल रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन भट्ठों की वजह से 55 से अधिक गांवों की हवा ज़हरीली हो चुकी है, जिससे दमा और सांस की बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
हरियाली के दुश्मन बने ईंट-भट्ठे
भट्ठों के आसपास के बगीचों में लगे आम, नीम और महुआ जैसे पेड़ सैकड़ों की संख्या में सूखते जा रहे हैं। राख और जहरीली गैसों के कारण खेतों की उपज पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाली पीढ़ियों को इसका गंभीर खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
एनजीटी भी मान चुका है खतरा
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) पहले ही यह स्वीकार कर चुका है कि पराली जलाने के साथ-साथ ईंट-भट्ठों की चिमनियों से निकलने वाला धुआं पर्यावरण के लिए बेहद घातक है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक निष्क्रियता और कथित माफियाओं की मिलीभगत के चलते कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मांग की है कि अवैध रूप से संचालित ईंट-भट्ठों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें बंद कराया जाए, ताकि बच्चों की शिक्षा, ग्रामीणों का स्वास्थ्य और पर्यावरण को बचाया जा सके।





