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बरेली

बरेली में सियासी हलचल उस समय तेज हो गई जब निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने नई राजनीतिक पार्टी बनाने का औपचारिक संकेत दे दिया।

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बरेली में सियासी हलचल उस समय तेज हो गई जब निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने नई राजनीतिक पार्टी बनाने का औपचारिक संकेत दे दिया। उन्होंने दावा किया कि सामान्य वर्ग और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के मतदाता भारतीय जनता पार्टी से दूरी बना चुके हैं और प्रदेश तथा देश की राजनीति में एक नए विकल्प की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

रविवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर कैंट स्थित परशुराम धाम में दर्शन-पूजन के बाद मीडिया से बातचीत में अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि आने वाले 20 से 25 दिनों में पार्टी के नाम, संविधान और घोषणा पत्र को अंतिम रूप देकर निर्वाचन आयोग के समक्ष पंजीकरण के लिए आवेदन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया को कानूनी रूप से मजबूत बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ताओं से सलाह ली जा रही है।

अग्निहोत्री ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी “छद्म सनातनी” राजनीति कर रही है और हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण के सहारे चुनावी लाभ लेती रही है। उनके अनुसार अब मतदाता इस राजनीति से ऊब चुके हैं और सामाजिक न्याय तथा समान अवसर की राजनीति की ओर देख रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा का राजनीतिक आधार कमजोर हो रहा है और उसका अस्तित्व धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि नई पार्टी के गठन के संबंध में एक ई-मेल आईडी जारी की गई है, जिस पर बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। उनके अनुसार प्राप्त आवेदनों में लगभग 60 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो वर्तमान में भाजपा के पदाधिकारी हैं। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।

अपने संबोधन में अग्निहोत्री ने एसटी-एससी एक्ट को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने सामान्य और OBC वर्ग की भावनाओं की अनदेखी करते हुए इस कानून को और कठोर बनाया है। उनका कहना था कि सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए सभी वर्गों की चिंताओं को समान रूप से सुना जाना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय मुद्दों का उल्लेख करते हुए उन्होंने एपस्टीन फाइल्स का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विदेशों में इस मामले को लेकर जवाबदेही तय की जा रही है और कई स्थानों पर इस्तीफे तक हुए हैं, जबकि भारत में इस विषय पर पारदर्शिता नहीं दिखाई जा रही। उनके इस बयान पर अभी तक किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

दिल्ली में रुचि तिवारी से जुड़ी घटना का उल्लेख करते हुए अग्निहोत्री ने इसे दुखद बताया और कहा कि वे स्वयं उनसे मिल चुके हैं। उन्होंने कहा कि समाज के उच्च पदों पर बैठे लोगों की चुप्पी से बेटियों की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं। उन्होंने विशेष रूप से ब्राह्मण समाज के प्रभावशाली वर्ग से मुखर होने की अपील की और कहा कि सामाजिक अन्याय के मामलों में मौन रहना उचित नहीं है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि अलंकार अग्निहोत्री अपनी पार्टी के गठन की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा कर लेते हैं, तो उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया समीकरण उभर सकता है। हालांकि नई पार्टी को जमीनी स्तर पर संगठन खड़ा करने, संसाधन जुटाने और व्यापक जनसमर्थन हासिल करने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले हफ्तों में प्रस्तावित पार्टी का नाम, विचारधारा और चुनावी एजेंडा क्या रूप लेता है। क्या यह पहल वास्तव में सामान्य और OBC मतदाताओं को एक नए राजनीतिक मंच पर संगठित कर पाएगी या यह प्रयास भी क्षेत्रीय राजनीति की सीमाओं में सिमट जाएगा — इसका जवाब आने वाला समय देगा।

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