फूलबाबू सपा में शामिल, पीलीभीत की राजनीति में हलचल

पीलीभीत। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच पीलीभीत की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। बीसलपुर विधानसभा सीट से तीन बार विधायक और बसपा शासनकाल में मंत्री रहे अनीस अहमद खां उर्फ फूलबाबू ने बहुजन समाज पार्टी को अलविदा कहकर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। उनके इस कदम को जिले की राजनीति में नए समीकरणों की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
लखनऊ में हुई औपचारिक एंट्री
रविवार को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में फूलबाबू ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। पार्टी नेतृत्व की ओर से इसकी औपचारिक घोषणा भी की गई। इससे पहले पिछले वर्ष लखनऊ में उनकी अखिलेश यादव से मुलाकात और सोशल मीडिया पर साझा तस्वीरों ने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर संकेत दे दिए थे।
हालांकि, तब तक यह स्पष्ट नहीं था कि वह कब और किस मंच से औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल होंगे। अब सदस्यता ग्रहण के साथ ही अटकलों पर विराम लग गया है।
मंगलवार को पीलीभीत में स्वागत कार्यक्रम
पूर्व मंत्री मंगलवार को पीलीभीत पहुंचेंगे। नकटादाना चौराहा स्थित पार्टी कार्यालय पर उनके स्वागत की तैयारी पूरी कर ली गई है। उनके मीडिया प्रतिनिधि मोहम्मद साबिर के अनुसार, स्वागत समारोह के बाद वह अपने आवास पर प्रेसवार्ता कर आगामी राजनीतिक रणनीति पर अपनी बात रखेंगे।
बीसलपुर से तीन बार विधायक
अनीस अहमद उर्फ फूलबाबू बीसलपुर विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रह चुके हैं। बसपा सरकार के दौरान उन्हें मंत्री पद भी मिला था। जिले में उनका अपना जनाधार और प्रभाव माना जाता है। ऐसे में उनका पाला बदलना केवल एक दलगत परिवर्तन नहीं, बल्कि स्थानीय राजनीति में संभावित शक्ति संतुलन के बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
सपा के भीतर भी बढ़ी हलचल
फूलबाबू की एंट्री से सपा के अंदर भी हलचल तेज हो गई है। विशेषकर वे नेता, जो आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट की तैयारी कर रहे थे, अब अपने समीकरणों को नए सिरे से आंक रहे हैं। मुस्लिम समाज से जुड़े कई संभावित दावेदारों के लिए यह बदलाव चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के चुनाव से पहले यह कदम सपा को बीसलपुर और आसपास के क्षेत्रों में मजबूती दे सकता है। वहीं बसपा के लिए इसे एक महत्वपूर्ण झटका माना जा रहा है, क्योंकि फूलबाबू को पार्टी के कद्दावर नेताओं में गिना जाता था।
2027 से पहले सियासी संदेश
उत्तर प्रदेश की राजनीति में दल-बदल कोई नई बात नहीं है, लेकिन चुनाव से पहले प्रभावशाली नेताओं का पाला बदलना हमेशा संदेश देता है। फूलबाबू का सपा में शामिल होना न केवल पीलीभीत, बल्कि आसपास की विधानसभा सीटों पर भी असर डाल सकता है।
अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि आगामी महीनों में पार्टी उन्हें क्या जिम्मेदारी देती है और क्या वह 2027 में फिर से बीसलपुर से चुनावी मैदान में उतरते हैं।






