UP में सड़क हादसे रोकने के लिए बड़ा कदम, हाईवे पर लगेंगे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस

उत्तर प्रदेश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और उससे होने वाली मौतों को रोकने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के 25 ऐसे जिलों की पहचान की गई है, जहां कुल सड़क दुर्घटना मौतों का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा दर्ज हुआ है। इन जिलों में अब हाईवे पर इलेक्ट्रॉनिक इन्फोर्समेंट डिवाइसेस लगाए जाएंगे, जिससे दुर्घटनाओं में 50 फीसदी तक कमी लाने का लक्ष्य तय किया गया है।
इन जिलों में बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, लखनऊ, कानपुर नगर, सीतापुर, उन्नाव, अलीगढ़, गोरखपुर, बिजनौर सहित अन्य जिले शामिल हैं।
सरकार की मंजूरी, बजट भी स्वीकृत
यह निर्णय उत्तर प्रदेश सड़क सुरक्षा कोष नियमावली के तहत गठित कोष प्रबंधन समिति की बैठक में लिया गया। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति भी जारी कर दी गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर को 50 प्रतिशत तक कम करने के लक्ष्य के तहत यह पहल शुरू की है। यह योजना सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी और भारत सरकार की “Special Assistance to States for Capital Investment 2025-26” योजना के अंतर्गत लागू की जा रही है।
हर जिले में करीब 1 करोड़ का खर्च
इस योजना के तहत प्रत्येक जिले में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाने पर लगभग 1 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। जिला सड़क सुरक्षा समितियों के माध्यम से इन उपकरणों की स्थापना कराई जाएगी।
हाईवे पर लगेंगे ये आधुनिक उपकरण
सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए हाईवे और प्रमुख मार्गों पर कई अत्याधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे, जिनमें शामिल हैं—
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स्पीड गन/कैमरा: तेज रफ्तार वाहनों की पहचान और चालान के लिए
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ANPR (Automatic Number Plate Recognition): बिना नंबर या फर्जी नंबर प्लेट वाले वाहनों की पहचान
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रेड लाइट कैमरा: ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने वालों पर नजर
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WIM मशीन: चलते वाहनों का वजन मापने के लिए
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फैराडे बैग: जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के सिग्नल को ब्लॉक करने के लिए
इन उपकरणों के जरिए ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा और उल्लंघन करने वालों पर स्वतः कार्रवाई होगी।
सड़क हादसों पर लगेगी लगाम
परिवहन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इन हाईटेक उपकरणों के लगने से न केवल ट्रैफिक नियमों का पालन बढ़ेगा, बल्कि ओवरस्पीडिंग, फर्जी नंबर प्लेट और ओवरलोडिंग जैसे मामलों में भी कमी आएगी।
आरटीओ प्रवर्तन प्रणव झा के अनुसार, पहले ही इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका था। बजट जारी होते ही इन उपकरणों की स्थापना का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।





