बरेली कैंट में 25 करोड़ का वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, कचरे से बनेगी ग्रीन एनर्जी

बरेली छावनी क्षेत्र को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में छावनी परिषद ने एक बड़ा कदम उठाया है। परिषद ने करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट स्थापित करने की योजना तैयार की है, जिसके माध्यम से कचरे का निस्तारण करने के साथ-साथ ग्रीन एनर्जी का उत्पादन भी किया जाएगा।
इस परियोजना के तहत छावनी क्षेत्र से प्रतिदिन निकलने वाले 35 से 40 टन गीले और सूखे कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया जाएगा। प्लांट में ठोस अपशिष्ट और सूखे कचरे से बिजली और बायो-सीएनजी तैयार की जाएगी, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में मदद मिलेगी।
छावनी परिषद की सीईओ डॉ. तनु जैन के अनुसार, इस परियोजना के संचालन से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भविष्य में छावनी क्षेत्र के निवासियों को पाइपलाइन के माध्यम से गैस आपूर्ति की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा सकेगी।
यह परियोजना कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के माध्यम से संचालित की जाएगी। इसके लिए ग्रीन एनर्जी क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न कंपनियों के साथ विचार-विमर्श किया जा रहा है, ताकि तकनीकी रूप से बेहतर और प्रभावी मॉडल तैयार किया जा सके।
6 MLD का एसटीपी भी होगा स्थापित
परियोजना के तहत छावनी क्षेत्र में 6 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) भी स्थापित किया जाएगा। इसके जरिए नालों और सीवर के पानी को शोधित कर स्वच्छ बनाया जाएगा।
यह एसटीपी न केवल छावनी क्षेत्र के भीतर निकलने वाले सीवर और नालों के पानी को ट्रीट करेगा, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से होकर आने वाले जल को भी शुद्ध करने में सहायक होगा। इससे नदियों और तालाबों में जाने वाले प्रदूषित पानी को रोका जा सकेगा।
विशेष रूप से मालियों की पुलिया के पास स्थित सरोवर, जो आर्मी सर्विस कोर क्षेत्र के समीप है, उसके जल को भी इस परियोजना के माध्यम से स्वच्छ किया जा सकेगा।
ग्रीन और स्मार्ट कैंट की दिशा में पहल
छावनी परिषद लगातार क्षेत्र को अधिक स्वच्छ, हरित और नागरिकों के लिए अनुकूल बनाने के प्रयास कर रही है। जल संरक्षण, कचरा प्रबंधन और हरित क्षेत्र के विस्तार जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की स्थापना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है, जिससे न केवल पर्यावरणीय सुधार होगा, बल्कि ऊर्जा उत्पादन के नए विकल्प भी विकसित होंगे।






