बरेली रेप व धर्म परिवर्तन केस: आरोपी की जमानत अर्जी खारिज

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से एक गंभीर आपराधिक मामले में अहम न्यायिक फैसला सामने आया है। महिला से दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन के दबाव के आरोपी की जमानत अर्जी अदालत ने खारिज कर दी है। यह मामला थाना इज्जतनगर क्षेत्र से जुड़ा है, जहां आरोपी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना इज्जतनगर क्षेत्र के फरीदापुर चौधरी निवासी आनन्द उर्फ इकरार खां पर एक महिला के साथ दुष्कर्म करने और उसे धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने के आरोप हैं। इस मामले में आरोपी की जमानत याचिका अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय के न्यायाधीश राघवेन्द्र मणि की अदालत में सुनवाई के दौरान खारिज कर दी गई।
अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी अधिवक्ता संतोष श्रीवास्तव ने अदालत में मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए बताया कि पीड़िता की बहन द्वारा थाना सीबीगंज में दर्ज कराई गई तहरीर के आधार पर यह मामला सामने आया था। शिकायत में कहा गया कि पीड़िता के पति का पहले ही निधन हो चुका है और वह अपने घर में अकेली रहती थी।
शिकायत के अनुसार, पिछले 6 से 7 महीनों से एक युवक का पीड़िता के घर आना-जाना था, जिसने खुद को ‘आनन्द’ नाम से परिचित कराया था। आरोप है कि 18 दिसंबर 2025 को जब पीड़िता घर पर अकेली थी, तब आरोपी जबरन घर में घुस आया और चाकू दिखाकर उसे धमकाया। इतना ही नहीं, आरोपी ने कथित तौर पर उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें भी खींच लीं और उन्हें सार्वजनिक करने की धमकी देकर दबाव बनाया।
तहरीर में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपी ने पीड़िता को जान से मारने की धमकी दी और लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित करता रहा। पीड़िता के पति के बाहर रहने और सामाजिक बदनामी के डर से वह लंबे समय तक यह बात किसी को नहीं बता सकी।
मामले में एक और गंभीर पहलू तब सामने आया जब पीड़िता ने आरोपी को उसके घर में नमाज पढ़ते देखा। इस पर पूछताछ करने पर आरोपी ने अपना वास्तविक नाम इकरार बताया। आरोप है कि उसने पीड़िता पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया और उसे मानसिक रूप से प्रभावित करने की कोशिश की।
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी द्वारा पीड़िता का कथित ‘ब्रेनवॉश’ किया गया और उसे अपने प्रभाव में लेने का प्रयास किया गया। मामले की गंभीरता, आरोपों की प्रकृति और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
अदालत के इस फैसले को मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल पुलिस इस पूरे प्रकरण की जांच में जुटी हुई है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
यह मामला न केवल कानून व्यवस्था बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी संवेदनशील माना जा रहा है, जिसमें महिलाओं की सुरक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता और आपराधिक मानसिकता जैसे कई गंभीर पहलू जुड़े हुए हैं।






