बरेली में कचरा संकट खत्म होने की ओर: सथरापुर में सॉलिड वेस्ट प्लांट अंतिम चरण में, जल्द शुरू होगा ट्रायल
अब सड़कों और डंपिंग यार्डों में लगे कूड़े के ढेर जल्द ही बीते दिनों की बात बन सकते हैं।

बरेली। शहरवासियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब सड़कों और डंपिंग यार्डों में लगे कूड़े के ढेर जल्द ही बीते दिनों की बात बन सकते हैं। नगर निगम द्वारा सथरापुर में बनाए जा रहे सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का निर्माण कार्य तेजी से अंतिम चरण में पहुंच गया है। अधिकारियों के अनुसार मशीनों का इंस्टॉलेशन लगभग पूरा हो चुका है और जल्द ही ट्रायल शुरू किया जाएगा।
जीरो वेस्ट मॉडल पर आधारित होगी व्यवस्था
नगर निगम की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को दिल्ली की संस्था ‘पीपुल्स एसोसिएशन फॉर टोटल हेल्प एप्लूज (पाथ्या)’ को सौंपा गया है। प्लांट को ‘जीरो वेस्ट मैनेजमेंट’ मॉडल पर विकसित किया जा रहा है, जिसमें कचरे का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी ने बताया कि निगम कार्यदायी संस्था को प्रति टन 446 रुपये का भुगतान करेगा। फिलहाल साइट पर मशीनों की फिटिंग का कार्य तेज गति से जारी है।
गीले कचरे से बनेगी गैस, खाद और सीएनजी
योजना के तहत शहर के 80 वार्डों से निकलने वाले करीब 500 मीट्रिक टन कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण किया जाएगा। डोर-टू-डोर कलेक्शन के माध्यम से गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग एकत्र किया जाएगा। गीले कचरे से बायोगैस, सीएनजी और जैविक खाद तैयार की जाएगी, जबकि सूखे कचरे का पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) किया जाएगा। इससे न सिर्फ शहर स्वच्छ होगा, बल्कि आय के नए स्रोत भी विकसित होंगे।
स्वच्छता रैंकिंग में सुधार की उम्मीद
नगर निगम को उम्मीद है कि इस प्लांट के शुरू होने से शहर की स्वच्छता रैंकिंग में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। पिछले वर्ष स्वच्छता सर्वेक्षण में बरेली को अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाया था, जिसकी मुख्य वजह लीगेसी वेस्ट के ढेर और प्रोसेसिंग यूनिट की कमी रही।
अब 15 अप्रैल के बाद केंद्रीय टीम के संभावित दौरे को देखते हुए निगम ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कचरा पृथक्करण और प्रोसेसिंग व्यवस्था को मजबूत कर इस बार रैंकिंग में लंबी छलांग लगाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।
रिपोर्ट देवेंद्र पटेल






