लक्ष्मी नगर में शराब की दुकान पर बवाल, पार्षदों व सैकड़ों लोगों ने DM से की शिकायत

रिपोर्ट: देवेंद्र पटेल, बरेली
बरेली के लक्ष्मी नगर क्षेत्र में संचालित एक शराब की दुकान को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। सोमवार को बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, भारतीय जनता पार्टी से जुड़े पार्षद और पूर्व पार्षद कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर दुकान को हटाने की मांग की। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में लोगों ने विरोध जताते हुए प्रशासन के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की।
आवंटन और स्थानांतरण पर उठे सवाल
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2025 में संजय नगर क्षेत्र के लिए आवंटित शराब की दुकान को कथित रूप से नियमों के विपरीत लक्ष्मी नगर कॉलोनी के पास स्थानांतरित कर दिया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दुकान का मूल रकबा तुलापुर क्षेत्र में बताया जा रहा है, ऐसे में वर्तमान स्थान पर संचालन इसकी वैधता पर सवाल खड़े करता है।
कई महीनों से जारी है विरोध
क्षेत्रवासियों के अनुसार, इस दुकान के खिलाफ पिछले कई महीनों से लगातार विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। आबकारी विभाग, जिलाधिकारी और पुलिस प्रशासन को कई बार लिखित शिकायतें भी दी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
समझौते के बावजूद नहीं हटी दुकान
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि 29 जुलाई 2025 को स्थानीय सांसद छपाल गंगवार के आवास पर एक लिखित समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत दुकान संचालक भानु प्रताप सिंह ने 1 अप्रैल 2026 से दुकान को अन्य स्थान या मूल आवंटित स्थल पर स्थानांतरित करने की सहमति दी थी।
इसके बावजूद तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी दुकान को नहीं हटाया गया, जिससे क्षेत्र में आक्रोश बढ़ गया है।
सामाजिक माहौल पर पड़ रहा असर
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शराब की दुकान रिहायशी इलाके, स्कूल और मंदिर के समीप स्थित है, जिससे सामाजिक वातावरण प्रभावित हो रहा है। विशेषकर महिलाओं और बच्चों को असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
पार्षदों और क्षेत्रवासियों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पूर्व में हुए समझौते के अनुरूप दुकान को तत्काल प्रभाव से अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाए, ताकि क्षेत्र में शांति और व्यवस्था बनी रह सके।
प्रशासनिक फैसले पर टिकी निगाहें
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और क्या स्थानीय लोगों को जल्द राहत मिल पाती है। फिलहाल, इस मुद्दे ने शहर में प्रशासनिक कार्यप्रणाली और नियमन व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।






