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बरेली

नैनीताल रोड पर ‘लाल निशान’ से गरमाया माहौल, व्यापारी मंडल ने उठाए बड़े सवाल

महानगर के नैनीताल रोड स्थित गाटा संख्या 481 पर प्रशासन द्वारा लगाए गए 'लाल निशानों' ने शहर का पारा गरमा दिया है।

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बरेली। महानगर के नैनीताल रोड स्थित गाटा संख्या 481 पर प्रशासन द्वारा लगाए गए ‘लाल निशानों’ ने शहर का पारा गरमा दिया है। अतिक्रमण विरोधी इस कार्रवाई को लेकर व्यापारियों ने मोर्चा खोल दिया है। रुहेलखंड उद्योग व्यापार मंडल ने इस पूरी प्रक्रिया को दोषपूर्ण बताते हुए नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपा है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?

विवाद की जड़ में उमेश गुप्ता (पुत्र स्व. रामेश्वर नाथ) की संपत्ति है, जिसे 10 अप्रैल 2026 को प्रशासन ने अतिक्रमण की श्रेणी में रखते हुए लाल निशान लगा दिया था। व्यापार मंडल का दावा है कि यह कार्रवाई न केवल तथ्यों के विपरीत है, बल्कि न्यायालय के आदेशों की भी अवहेलना है।

दस्तावेजों और पैमाइश पर उठे सवाल

व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार मेहरोत्रा ने तकनीकी पहलुओं को उजागर करते हुए प्रशासन को घेरा है:

  • PWD मानक: पीडब्ल्यूडी के 27 सितंबर 2019 के पत्र के अनुसार, संबंधित निर्माण सड़क के मध्य से 12.50 मीटर की सुरक्षित दूरी पर है। यह सरकारी सड़क की सीमा में नहीं आता।

  • तहसील रिपोर्ट: एसडीएम, तहसीलदार और लेखपाल की पूर्व रिपोर्ट के अनुसार, यह भूमि चकरोड, तालाब, नाला या किसी अन्य राजस्व भूमि को प्रभावित नहीं करती है।

  • BDA का स्वामित्व: व्यापारियों ने सवाल उठाया कि जब यह संपत्ति स्वयं बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) द्वारा बेची गई है, तो इसे अब अतिक्रमण कैसे घोषित किया जा सकता है?

न्यायालय की रोक के बावजूद कार्रवाई का आरोप

व्यापारी नेताओं ने दावा किया कि इस संपत्ति पर हाईकोर्ट और सिविल कोर्ट (वाद संख्या 583/1998) का पहले से ही स्थायी स्थगन (Stay Order) प्रभावी है। न्यायालय ने स्पष्ट आदेश दिया था कि बिना विधिक प्रक्रिया अपनाए कोई भी ध्वस्तीकरण नहीं किया जाएगा। ऐसे में लाल निशान लगाना न्यायिक आदेशों की मर्यादा के खिलाफ है।

व्यापारी मंडल की मुख्य मांगें

जिला अध्यक्ष दिनेश चंद्र सक्सेना और शहर अध्यक्ष मनोज कपूर ने प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  1. सड़क की चौड़ाई केवल पीडब्ल्यूडी के मानकों के आधार पर ही तय हो।

  2. संपत्ति को अतिक्रमण घोषित करने के तकनीकी और कानूनी आधारों को सार्वजनिक किया जाए।

  3. पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए।

    लाइव भारत टीवी | बरेली रिपोर्ट: देवेंद्र पटेल

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