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बरेली

UPSC में असफलता के बाद रचा ‘फर्जी IAS’ का खेल, तीन बहनों ने नौकरी के नाम पर ठगे लाखों।

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UPSC में असफलता के बाद रचा ‘फर्जी IAS’ का खेल, तीन बहनों ने नौकरी के नाम पर ठगे लाखों।
📍 बरेली | ब्यूरो रिपोर्ट
बरेली में खुद को आईएएस अधिकारी बताकर लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने तीन बहनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपितों में मुख्य भूमिका निभाने वाली विप्रा शर्मा यूपीएससी में चयनित न होने के बाद फर्जी पहचान बनाकर ठगी करने लगी थी।
पुलिस के मुताबिक, विप्रा शर्मा कभी खुद को एसडीएम तो कभी एडीएम बताकर लोगों को झांसे में लेती थी। बाद में उसने अपनी बड़ी बहन शिखा पाठक और ममेरी बहन दीक्षा को भी इस गिरोह में शामिल कर लिया। तीनों मिलकर सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से लाखों रुपये ऐंठती थीं।
55 लाख रुपये खाते में फ्रीज, नकदी बरामद
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपितों के खातों से करीब 55 लाख रुपये फ्रीज किए हैं, जबकि 4.5 लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए हैं। तीनों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। पुलिस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।
नौकरी का झांसा देकर फंसाए कई लोग
मामले की शिकायत फाइक एन्क्लेव निवासी प्रीति लायल ने बारादरी थाने में दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में उनकी मुलाकात शिखा पाठक से हुई थी, जिसने अपनी बहन विप्रा शर्मा को एसडीएम बताते हुए नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया।
झांसे में आकर प्रीति ने अपने परिचितों—आदिल खान, मुशाहिद अली और संतोष कुमार—को भी इस योजना में शामिल किया। आरोप है कि चारों से मिलाकर आरोपितों ने लाखों रुपये वसूल लिए।
फर्जी नियुक्ति पत्र से हुआ खुलासा
आरोपितों ने भरोसा दिलाने के लिए राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश, लखनऊ के नाम से कंप्यूटर ऑपरेटर पद के फर्जी नियुक्ति पत्र जारी किए। दस्तावेजों पर अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर भी किए गए थे।
जब पीड़ितों को शक हुआ और उन्होंने जांच कराई तो पूरा मामला फर्जी निकला। इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पूछताछ में खुला पूरा राज
पुलिस ने पहले विप्रा शर्मा और शिखा पाठक को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों ने अपनी ममेरी बहन दीक्षा का नाम भी बताया, जिसके बाद उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया। तीनों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया है।
पुलिस कर रही नेटवर्क की जांच
बारादरी थाना पुलिस का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और अन्य पीड़ितों की भी तलाश की जा रही है। मामले में आगे की जांच जारी है और जल्द ही और खुलासे होने की संभावना है।

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