बरेली महिला अस्पताल में प्रशासनिक छापा, CMS समेत कई डॉक्टर गायब
मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए तीन महीने बाद की तारीख, व्यवस्थाओं की खुली पोल

रिपोर्ट : देवेंद्र पटेल
बरेली। जिला महिला अस्पताल में सोमवार को प्रशासनिक अधिकारियों की टीम द्वारा किए गए औचक निरीक्षण से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं और व्यवस्थाओं में कई गंभीर खामियां सामने आईं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) समेत कई डॉक्टर और कर्मचारी ड्यूटी से अनुपस्थित मिले, जबकि मरीजों ने भी इलाज और जांच व्यवस्था को लेकर गंभीर शिकायतें अधिकारियों के सामने रखीं।
अपर जिलाधिकारी प्रशासन पूर्णिमा सिंह के नेतृत्व में निरीक्षण टीम में उप जिलाधिकारी न्यायिक मीरगंज निधि डोडवाल, अपर उपजिलाधिकारी सदर मल्लिका नैन, जिला प्रोबेशन अधिकारी मोनिका राना और सहायक निदेशक मत्स्य गायत्री पाण्डेय शामिल रहीं। टीम ने अस्पताल के विभिन्न वार्डों, हेल्प डेस्क, अल्ट्रासाउंड कक्ष और इमरजेंसी सेवाओं का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान जिला महिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. त्रिभुवन प्रसाद अनुपस्थित मिले। वहीं रोस्टर के अनुसार ड्यूटी पर तैनात गायनेकोलॉजिस्ट डा. शमी और डा. मिनाक्षी भी मौजूद नहीं थीं। इसके अलावा नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ के कई कर्मचारी भी ड्यूटी से नदारद पाए गए, जिस पर अधिकारियों ने नाराजगी जताई।
अल्ट्रासाउंड व्यवस्था पर उठे सवाल
अल्ट्रासाउंड कक्ष के निरीक्षण में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। मरीजों के आने-जाने का कोई वैध रजिस्टर मौके पर उपलब्ध नहीं मिला। वहीं अल्ट्रासाउंड नोडल अधिकारी एवं रेडियोलॉजिस्ट सीपी सिंह भी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। अधिकारियों ने संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच के लिए मरीजों को करीब तीन महीने बाद की तारीख दी जा रही है, जिससे मरीजों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
वार्ड सहायक पर मरीजों से दुर्व्यवहार के आरोप
अस्पताल के अल्ट्रासाउंड वार्ड में तैनात वार्ड सहायक नीलम यादव के खिलाफ मरीजों से दुर्व्यवहार की कई शिकायतें अधिकारियों को मिलीं। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
हेल्प डेस्क और इमरजेंसी सेवाओं की बदहाल स्थिति
निरीक्षण टीम को हेल्प डेस्क पर शिकायत पंजिका में दर्ज शिकायतों के निस्तारण की स्पष्ट स्थिति भी नहीं मिली। अधिकारियों ने व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के निर्देश दिए।
वहीं इमरजेंसी वार्ड के बाहर मरीजों की सुविधा के लिए न तो स्ट्रेचर और व्हीलचेयर उपलब्ध मिलीं और न ही कोई वार्ड सहायक या सुरक्षा गार्ड मौजूद मिला। इस अव्यवस्था पर अधिकारियों ने कड़ी नाराजगी जताई।
मरीजों ने सुनाई अपनी परेशानी
निरीक्षण के दौरान अस्पताल पहुंचे मरीजों ने भी अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं। मरीज तरनीम ने बताया कि अस्पताल में उनकी पैथोलॉजी जांच नहीं की जा रही है, जिसके कारण उन्हें बाहर जांच करानी पड़ रही है और करीब 1700 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
वहीं दूसरी मरीज पूनम शुक्ला ने बताया कि अस्पताल में उन्हें प्रोजेस्ट्रोन इंजेक्शन उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसके चलते बाहर से इंजेक्शन लगवाना पड़ा।
तत्काल सुधार के निर्देश
निरीक्षण टीम ने अस्पताल प्रशासन को व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार लाने, मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अस्पताल स्टाफ में हड़कंप का माहौल बना हुआ है।






