रिश्वत लेते पकड़े गए लेखपाल और कानूनगो निलंबित, चकबंदी विभाग में मचा हड़कंप

बरेली में चकबंदी विभाग में लगातार सामने आ रहे रिश्वतखोरी के मामलों ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किए गए चकबंदी विभाग के लेखपाल और कानूनगो को विभाग ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार, बीते बुधवार देर रात फरीदपुर क्षेत्र में भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एंटी करप्शन) की टीम ने चकबंदी लेखपाल अजय को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। आरोप है कि उसने गांव के एक व्यक्ति से चकबंदी के दौरान जमीन की नापतौल और संबंधित कार्य कराने के बदले रिश्वत मांगी थी।
पीड़ित की शिकायत पर एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाकर आरोपी लेखपाल को रंगे हाथ पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद विभाग ने आरोपी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे निलंबित कर दिया।
वहीं इससे एक सप्ताह पहले फतेहगंज पूर्वी क्षेत्र में भी एंटी करप्शन टीम ने कार्रवाई करते हुए चकबंदी कानूनगो कमल सुधीर शुक्ला को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। शिकायतकर्ता राजीव, निवासी खजुरिया ने आरोप लगाया था कि कानूनगो कार्य कराने के नाम पर अवैध वसूली कर रहा था। जांच के बाद टीम ने उसे भी रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया था।
लगातार दो अधिकारियों के रिश्वत लेते पकड़े जाने से चकबंदी विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोनों कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे कठोर कार्रवाई की जाएगी।
इन घटनाओं के बाद आम लोगों में भी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी दिखाई दे रही है। लोगों का कहना है कि जमीन और चकबंदी से जुड़े मामलों में लंबे समय से भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण कर्मचारियों के हौसले बढ़ते जा रहे थे।





