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उत्तरप्रदेश

खरीफ गोष्ठी में गूंजे किसानों के मुद्दे, मंत्रियों ने दिया समाधान का भरोसा

निराश्रित पशु, सिंचाई, एमएसपी और खाद संकट पर किसानों ने उठाई आवाज, सरकार बोली—समस्याओं का होगा समाधान

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रिपोर्ट: देवेंद्र पटेल | बरेली
बरेली के इज्जतनगर स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) के विवेकानंद ऑडिटोरियम में शुक्रवार को अलीगढ़, आगरा और बरेली मंडल की “मंडलीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी-2026” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख और पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने किसानों और अधिकारियों के साथ खरीफ फसलों, सिंचाई, निराश्रित पशुओं, एमएसपी और उर्वरक संकट जैसे अहम मुद्दों पर मंथन किया।
गोष्ठी में अलीगढ़, आगरा और बरेली मंडल के किसानों एवं अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएं खुलकर रखीं। पीलीभीत के किसानों ने छुट्टा पशुओं से फसलों की सुरक्षा के लिए सोलर फेंसिंग की मांग उठाई, वहीं बंदरों से फसलों को होने वाले नुकसान और भूमि विवादों के समाधान की भी मांग की गई।
शाहजहांपुर के किसानों ने कृषि यंत्रों पर लक्ष्य बढ़ाने, खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने और छुट्टा पशुओं की समस्या खत्म करने की मांग रखी। बदायूं से मक्का उत्पादन के लिए अतिरिक्त ड्रायर स्थापित करने और आलू आधारित उद्योग लगाने का सुझाव दिया गया। किसानों ने यह भी मांग की कि एमएसपी पर व्यापारियों की नहीं बल्कि किसानों की फसल खरीदी जाए।
बरेली में बड़े गौसदनों की उठी मांग
बरेली मंडल के अधिकारियों ने बताया कि गौवंश संरक्षण के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम चल रहा है, लेकिन इसके बावजूद बड़े गौआश्रय स्थलों की आवश्यकता बनी हुई है। किसानों ने क्लस्टर गठन योजना में छोटे किसानों को भी लाभ देने के लिए जोत सीमा कम करने की मांग की।
बैठक में किसानों ने सिंचाई व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। किसानों का कहना था कि नवंबर में गेहूं बुवाई के समय नहरों में पानी नहीं मिलता क्योंकि उसी समय सफाई कार्य शुरू हो जाता है और पानी दिसंबर में छोड़ा जाता है, जिससे फसल प्रभावित होती है।
आगरा और अलीगढ़ मंडल के किसानों ने भी रखीं समस्याएं
आगरा मंडल के किसानों ने मिलेट्स उत्पादन के बावजूद प्रशिक्षण केंद्र न होने, खारे पानी की समस्या और पॉलीहाउस व मशरूम यूनिट को कृषि श्रेणी की बिजली सुविधा देने की मांग रखी। वहीं अलीगढ़ मंडल के अधिकारियों ने मक्का की प्रजातियों को जल्द नोटिफाई करने और बाजरा खरीद का लक्ष्य बढ़ाने की बात कही।
हाथरस के किसानों ने आलू की फसल का उचित मूल्य न मिलने की शिकायत की, जबकि फिरोजाबाद के किसानों ने छोटे ट्रैक्टरों पर सब्सिडी और वर्मी कम्पोस्ट पर दोबारा अनुदान शुरू करने की मांग उठाई।
“गोबर से खाद बनाने के लिए बनेंगे 18 मंडलों में कारखाने”
पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुना गया है और सरकार समाधान की दिशा में काम करेगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश के 18 मंडलों में गोबर से खाद बनाने के कारखाने स्थापित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार बड़े गौसदन निर्माण और गौवंश सुधार की दिशा में भी तेजी से काम करेगी। साथ ही जानकारी दी कि छह गौवंश पालने वाले किसानों को 6000 रुपये भरण-पोषण सहायता और पशुशेड उपलब्ध कराया जाएगा।
“सहफसली खेती अपनाएं किसान”
कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख ने किसानों से सहफसली खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसानों द्वारा उठाई गई समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और सिंचाई सहित अन्य समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित विभागों से समन्वय किया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को उड़द और मक्का के बीज किट वितरित किए गए। दो किसानों को ट्रैक्टर की प्रतीकात्मक चाबी और 24 लाख रुपये के अनुदान का चेक भी सौंपा गया। वहीं गेहूं की फसल नुकसान होने पर एक किसान को 51 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान की गई।
बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त, प्रमुख सचिव कृषि, कृषि निदेशक, मंडलायुक्त भूपेंद्र एस. चौधरी समेत तीनों मंडलों के जिला स्तरीय अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

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