36 घंटे तक बैरिक में कैद: व्यापारी को दी गई थर्ड डिग्री, SSP के एक्शन से चार सिपाही सस्पेंड
प्लॉट डील के नाम पर 10 लाख की ठगी, फिर पुलिसिया प्रताड़ना का आरोप

बरेली। जिले में पुलिस और कथित ठगों की मिलीभगत का सनसनीखेज मामला सामने आया है। प्लॉट खरीदने के नाम पर पहले व्यापारी से 10 लाख रुपये ठग लिए गए, फिर शिकायत करने पहुंचे पीड़ित को ही पुलिसकर्मियों ने उठा लिया। आरोप है कि उसे करीब 36 घंटे तक थाने की बैरिक में बंद रखकर प्रताड़ित किया गया, एनकाउंटर और जेल भेजने की धमकी दी गई, यहां तक कि छोड़ने के एवज में 50 हजार रुपये भी वसूले गए। मामला सामने आने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य ने चार सिपाहियों को निलंबित कर विभागीय जांच बैठा दी है।
प्लॉट खरीदने पहुंचा व्यापारी, रास्ते में गायब हुए 10 लाख
हाफिजगंज क्षेत्र के गांव आसपुर निवासी सोमवीर कश्यप के मुताबिक, एक परिचित ने शहर में विकसित हो रही कॉलोनी में प्लॉट दिलाने का भरोसा दिया था। 12 मई को वह अपने एक साथी के साथ एग्रीमेंट कराने और भुगतान देने पहुंचा। आरोप है कि इसी दौरान पहले से जाल बिछाकर बैठे कुछ लोगों ने उसके पास मौजूद 10 लाख रुपये से भरा बैग गायब कर दिया।
पीड़ित का आरोप है कि जब उसने रुपये वापस मांगने और शिकायत की बात कही तो पूरा खेल पुलिस तक पहुंच गया। इसके दो दिन बाद 14 मई को विलयधाम के पास से चार पुलिसकर्मियों ने उसे जबरन कार में बैठा लिया और थाना बारादरी ले आए।
थाने की बैरिक में बंद कर दी गई ‘प्राइवेट जेल’
पीड़ित का आरोप है कि उसे थाने के रिकॉर्ड में दाखिल किए बिना बैरिक में बंद रखा गया। वहां उसके साथ मारपीट और मानसिक प्रताड़ना की गई। सिपाहियों ने खुद को प्रभावशाली बताते हुए जेल भेजने और फर्जी एनकाउंटर तक की धमकी दी। आरोप है कि दबाव बनाकर उसके घरवालों से 50 हजार रुपये मंगवाए गए, जिसके बाद अगले दिन उसे छोड़ा गया।
इतना ही नहीं, पीड़ित के मोबाइल फोन से कई जरूरी चीजें डिलीट कराई गईं और कई सादे कागजों पर हस्ताक्षर भी करवाए गए।
SSP का बड़ा एक्शन, चार सिपाही निलंबित
मामले की शिकायत जब वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य तक पहुंची तो उन्होंने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी सिपाहियों आशीष मिश्रा, राहुल कुमार, आदित्य प्रताप सिंह और सिद्धांत चौधरी को निलंबित कर दिया। SSP ने पूरे प्रकरण की विभागीय जांच भी बैठा दी है।
एसएसपी अनुराग आर्य ने कहा कि शिकायत बेहद गंभीर है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
‘एसओजी’ बनकर करते थे वसूली!
सूत्रों के मुताबिक, निलंबित चारों सिपाही पहले सेटेलाइट चौकी पर तैनात थे और लंबे समय से कथित तौर पर अवैध वसूली के नेटवर्क में सक्रिय थे। आरोप है कि यह लोग खुद को बारादरी थाने की ‘एसओजी टीम’ बताकर लोगों को डराते-धमकाते थे। तस्करों और संदिग्ध कारोबारियों से सेटिंग कर मोटी रकम वसूली जाती थी। विरोध करने वालों को जेल भेजने की धमकी देना इनके काम करने का तरीका बन चुका था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच हुई तो कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
पुलिस महकमे में मचा हड़कंप
चार सिपाहियों के निलंबन के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। मामले को लेकर अधिकारियों ने अंदरखाने कई और कर्मियों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है। वहीं पीड़ित व्यापारी का कहना है कि उसे अब भी जान का खतरा बना हुआ है और वह निष्पक्ष जांच चाहता है।






