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बरेली

मुहर्रम जुलूस को बदनाम करने की साजिश बेनकाब, पाकिस्तान समर्थक नारे लगाने का आरोप निकला झूठा

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मुहर्रम जुलूस को बदनाम करने की साजिश बेनकाब, पाकिस्तान समर्थक नारे लगाने का आरोप निकला झूठा

कैमरे के पीछे से खुद लगाए नारे, वीडियो वायरल कर सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश; आरोपी पर एफआईआर दर्ज

बरेली। मुहर्रम के जुलूस में पाकिस्तान समर्थक नारे लगाए जाने के दावे का पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि जिस वीडियो के आधार पर जुलूस पर आरोप लगाए जा रहे थे, उसमें कथित नारे जुलूस में शामिल लोगों ने नहीं बल्कि वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने स्वयं कैमरे के पीछे से लगाए थे। पुलिस ने मामले को सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की साजिश मानते हुए आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार रविवार देर रात मुहर्रम का जुलूस अपने निर्धारित मार्ग से गुजर रहा था। इसी दौरान योगेंद्र पाल नामक व्यक्ति ने अपने मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्डिंग की। आरोप है कि वीडियो बनाते समय वह स्वयं कैमरे के पीछे से आपत्तिजनक और पाकिस्तान समर्थक नारे लगाता रहा, ताकि ऐसा प्रतीत हो कि जुलूस में शामिल लोग यह नारेबाजी कर रहे हैं।

वीडियो वायरल कर फैलाया भ्रम

वीडियो रिकॉर्ड करने के बाद उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित कर यह दावा किया गया कि मुहर्रम जुलूस में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए जा रहे हैं। वीडियो वायरल होते ही मामला चर्चा का विषय बन गया और सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं।

हालांकि पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी। जांच के दौरान वीडियो की तकनीकी पड़ताल, घटनास्थल की जानकारी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर सच्चाई सामने आ गई।

जांच में खुली साजिश की परतें

एसपी सिटी मुकेश मिश्र ने बताया कि जांच में स्पष्ट हुआ है कि वीडियो में सुनाई देने वाले नारे जुलूस में शामिल लोगों द्वारा नहीं लगाए गए थे। जांच के दौरान यह पुष्टि हुई कि कथित नारे स्वयं वीडियो बनाने वाले योगेंद्र पाल ने कैमरे के पीछे से लगाए थे।

पुलिस का कहना है कि आरोपी ने एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत वीडियो बनाकर उसे इस प्रकार प्रसारित किया, जिससे धार्मिक और सांप्रदायिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सके।

आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज

मामले की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने योगेंद्र पाल के खिलाफ सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने, भ्रामक सूचना प्रसारित करने तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस अब मामले की विस्तृत जांच कर रही है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि वीडियो को किन-किन माध्यमों से प्रसारित किया गया।

अफवाहों से बचने की अपील

पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली किसी भी वीडियो या सूचना को सत्यापित किए बिना साझा न करें। प्रशासन का कहना है कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मुहर्रम जैसे संवेदनशील अवसर पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश को पुलिस ने समय रहते बेनकाब कर दिया, जिससे किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न होने से बच गई।

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