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बरेली हिंसा मामले में तौकीर रजा को बड़ा झटका, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की।

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बरेली हिंसा मामले में मौलाना तौकीर रजा को हाईकोर्ट से झटका, जमानत याचिका खारिज।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डॉ. नफीस को भी नहीं दी राहत; 26 सितंबर की हिंसा से जुड़े मामलों में सुनवाई के बाद फैसला

बरेली। 26 सितंबर को बरेली में हुई हिंसा के मामले में आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। उनके साथ डॉ. नफीस को भी अदालत से जमानत नहीं मिल सकी।

मामले में सभी पक्षों की बहस 26 मई को पूरी हो गई थी, जिसके बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। मौलाना तौकीर रजा समेत अन्य आरोपियों ने जमानत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने पक्ष रखा। जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की सिंगल बेंच ने सुनवाई के बाद जमानत याचिका खारिज करने का फैसला सुनाया।

फतेहगढ़ जेल में बंद हैं तौकीर रजा

मौलाना तौकीर रजा फिलहाल फर्रुखाबाद की फतेहगढ़ जेल में बंद हैं। बरेली हिंसा से जुड़े मामलों में उनके खिलाफ बारादरी, कोतवाली, कैंट, किला और प्रेमनगर थानों में मुकदमे दर्ज किए गए हैं।

पुलिस ने जांच के दौरान तौकीर रजा को हिंसा की साजिश में प्रमुख आरोपी बताया है। हालांकि बचाव पक्ष लगातार इन आरोपों से इनकार करता रहा है।

बचाव पक्ष ने बताया राजनीतिक साजिश

तौकीर रजा की ओर से दाखिल जमानत अर्जी में कहा गया कि उन्हें राजनीतिक कारणों से मामले में फंसाया गया है। बचाव पक्ष की दलील थी कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में पर्याप्त ठोस आधार नहीं है और मामले की जांच भी पूरी हो चुकी है।

इसी आधार पर अदालत से जमानत देने की मांग की गई थी, लेकिन कोर्ट ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद राहत देने से इनकार कर दिया।

अभियोजन बोला—हिंसा सुनियोजित थी

अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कोर्ट में कहा कि 26 सितंबर को नमाज के बाद हुई हिंसा अचानक नहीं, बल्कि कथित रूप से सुनियोजित थी। अभियोजन के मुताबिक शहर के कई हिस्सों में आगजनी, फायरिंग और पुलिस पर हमले की घटनाएं हुई थीं।

पुलिस का दावा है कि हिंसा से जुड़े कुल 10 मामलों में रिपोर्ट दर्ज की गई और इनमें मौलाना तौकीर रजा को आरोपी बनाया गया। जांच एजेंसियों ने उन्हें हिंसा की साजिश का प्रमुख आरोपी बताया है।

पहले भी एक जमानत अर्जी हो चुकी है खारिज

इससे पहले 5 जून को भी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली हिंसा से जुड़ी एक अन्य एफआईआर में तौकीर रजा की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। उस मामले में न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने फैसला सुनाया था।

विभिन्न मामलों की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने निर्णय सुरक्षित रखा था। अब एक और मामले में जमानत याचिका खारिज होने से तौकीर रजा को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।

26 सितंबर की हिंसा के बाद दर्ज हुए थे कई मुकदमे

बरेली में 26 सितंबर को हुई हिंसा के बाद पुलिस ने अलग-अलग थाना क्षेत्रों में कई मुकदमे दर्ज किए थे। पुलिस की ओर से हिंसा, आगजनी, फायरिंग और पुलिस टीम पर हमले जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन मामलों में कई आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई थी।

मौलाना तौकीर रजा के खिलाफ दर्ज मुकदमों में अभी कानूनी प्रक्रिया जारी है और हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिलने के बाद फिलहाल उन्हें न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा।

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