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बरेली

Bareilly Blast Case: एनजीटी के मुआवजा आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगा जिला प्रशासन

बरेली विस्फोट मामला: एनजीटी के आदेश को चुनौती देगा जिला प्रशासन, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होगी SLP

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सिरौली थाना क्षेत्र के ग्राम कल्याणपुर में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट मामले में जिला प्रशासन अब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है। मृतकों और घायलों को मुआवजा देने से जुड़े एनजीटी के आदेश को चुनौती देने के लिए प्रशासन द्वारा स्पेशल लीव पेटिशन (SLP) दाखिल की जाएगी।

मुख्य सचिव के निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने इस दिशा में औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल करने की जिम्मेदारी एडीएम सिटी सौरभ दुबे को सौंपी है। एडीएम सिटी वर्तमान में विस्फोटक एवं आयुध अधिनियम से जुड़े मामलों के प्रभारी अधिकारी भी हैं।

दरअसल, राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने एक अंग्रेजी समाचार पत्र में प्रकाशित विस्फोट की खबर का स्वतः संज्ञान लेते हुए इस प्रकरण में वाद दर्ज किया था। इसके बाद एनजीटी ने जिला प्रशासन को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। सुनवाई के बाद 18 फरवरी 2025 को एनजीटी ने आदेश पारित करते हुए कहा था कि राज्य सरकार पीड़ितों को मुआवजा देने की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती और पीड़ितों को तत्काल राहत देना आवश्यक है।

एनजीटी के आदेश के अनुसार, विस्फोट में मृत प्रत्येक व्यक्ति के परिजनों को 20 लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने की बात कही गई थी। वहीं, 50 प्रतिशत से अधिक जलने वाले घायलों को 15 लाख रुपये, 25 से 50 प्रतिशत तक झुलसे व्यक्तियों को 10 लाख रुपये, 5 से 25 प्रतिशत तक चोटिल लोगों को 5 लाख रुपये तथा मामूली जलन या साधारण चोटों वाले घायलों को 2 लाख रुपये देने का निर्देश दिया गया था।

प्राधिकरण ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया था कि मृतका रुखसाना के परिजन 20 लाख रुपये मुआवजे के हकदार हैं। इसके अलावा घायल रहमान शाह और छोटी बेगम को भी उनकी जलने की चोटों के अनुसार मुआवजा देने का उल्लेख किया गया था। मृतकों और घायलों की पहचान के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सहायता लेने की भी बात कही गई थी।

इस बीच, एडीएम फाइनेंस संतोष कुमार सिंह ने एडीएम सिटी को प्रकरण की मूल पत्रावली सौंप दी है। पत्र में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय में स्पेशल लीव पेटिशन दाखिल करने की कार्रवाई शीघ्र सुनिश्चित की जाए। गौरतलब है कि 22 सितंबर 2025 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभिन्न जिलों में अवैध पटाखा गोदामों और फैक्ट्रियों में हुए विस्फोट मामलों में एनजीटी के आदेशों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने के निर्देश दिए गए थे।

कैसे हुआ था विस्फोट

यह दर्दनाक हादसा 2 अक्टूबर 2024 को थाना सिरौली के ग्राम कल्याणपुर में हुआ था। अवैध रूप से संचालित पटाखा फैक्ट्री में दोपहर के समय विस्फोट हुआ, जिसमें रहमान शाह और उनकी पत्नी छोटी बेगम गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वहीं, उनके परिवार के छह सदस्यों—तबस्सुम, निखत उर्फ नीना, शहजान, हरसान, सितारा, फातिमा—और पड़ोस की महिला रुखसाना की मौत हो गई थी।

एनजीटी के निर्देश पर यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) की जांच में सामने आया था कि नासिर शाह, पटाखे बेचने के लाइसेंस की आड़ में अपने ससुर रहमान शाह के घर में अवैध पटाखा फैक्ट्री चला रहा था। विस्फोट की चपेट में आसपास के कई मकान भी क्षतिग्रस्त हुए थे।

इस मामले में थाना सिरौली में रहमान शाह, उसके पुत्र वाहिद, कौआ टोला निवासी नासिर, नाजिम, हसनैन, अहमद मियां और मोहम्मद मियां समेत कुल सात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।

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