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पद्मश्री 2026: बिहार के डॉ. गोपालजी त्रिवेदी ने लीची और मखाना खेती को दी नई पहचान
पद्मश्री 2026: बिहार के डॉ. गोपालजी त्रिवेदी ने लीची और मखाना खेती को दी नई पहचान

पद्म पुरस्कार 2026 की सूची में जब बिहार के डॉ. गोपालजी त्रिवेदी का नाम पद्मश्री के लिए सामने आया, तो यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि बिहार की खेती, किसानों और वैज्ञानिक सोच की जीत माना गया। लीची के बागानों से लेकर जलजमाव वाले तालाबों में मखाना की खेती तक, डॉ. त्रिवेदी ने राज्य की कृषि को नई दिशा दी और किसानों की आय बढ़ाने में अहम योगदान दिया।
📌 लीची के बागानों में नई जान
डॉ. त्रिवेदी को लीची की खेती में ‘क्रांतिकारी वैज्ञानिक’ कहा जाता है।
- उन्होंने पुराने और अनुपयोगी होते जा रहे लीची बागानों को Rejuvenation Canopy Management तकनीक से फिर से उपजाऊ बना दिया।
- इस तकनीक ने हजारों किसानों की आमदनी बढ़ाई।
- मुजफ्फरपुर की लीची को वैश्विक पहचान दिलाने में उनका योगदान निर्णायक रहा।
📌 मखाना खेती में नवाचार
- डॉ. त्रिवेदी ने जलजमाव वाले तालाबों में मखाना की वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा दिया।
- इससे किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिला और बिहार की कृषि विविधता को नई पहचान मिली।
- मखाना को सुपरफूड के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही।
📌 बिहार की कृषि को नई पहचान
डॉ. गोपालजी त्रिवेदी का कार्य केवल वैज्ञानिक शोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने किसानों को प्रशिक्षण देकर आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया।
- उनकी पहल ने पारंपरिक खेती को आधुनिक विज्ञान से जोड़ा।
- किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में उनका योगदान सराहनीय है।
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