अंटार्कटिका में बहता ‘खूनी झरना’: आखिर क्यों लाल है ब्लड फॉल्स का पानी, वैज्ञानिकों ने सुलझाया रहस्य
Blood Falls Antarctica Mystery: अंटार्कटिका में लाल झरने का रहस्य

अंटार्कटिका की भीषण ठंड, चारों ओर फैली बर्फ की चादर और शून्य से कई डिग्री नीचे का तापमान—इसी जमी हुई दुनिया के बीच एक ऐसा नज़ारा मौजूद है, जो पहली नज़र में किसी को भी हैरान कर सकता है। मैकमुर्डो ड्राई वैली (McMurdo Dry Valleys) क्षेत्र में स्थित टेलर ग्लेशियर के भीतर से गिरता एक झरना अपने असामान्य रंग की वजह से वर्षों से वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए रहस्य बना रहा है।
इस झरने का पानी सामान्य नहीं, बल्कि बिल्कुल खून की तरह गहरा लाल दिखाई देता है। इसी वजह से इसे ‘ब्लड फॉल्स’ (Blood Falls) नाम दिया गया है। बर्फ से ढके इलाके में लाल पानी का बहना न सिर्फ डरावना प्रतीत होता है, बल्कि यह प्राकृतिक विज्ञान के लिए भी एक बड़ी पहेली रहा है।
लंबे समय तक यह सवाल बना रहा कि आखिर इस झरने का पानी लाल क्यों है। क्या इसमें किसी तरह का जैविक तत्व मौजूद है, या फिर यह किसी रासायनिक प्रतिक्रिया का नतीजा है? कई दशकों तक वैज्ञानिक इस रहस्य की परतें खोलने की कोशिश करते रहे।
अब आधुनिक शोध और तकनीकी जांच के बाद वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि ब्लड फॉल्स के लाल रंग के पीछे किसी तरह का रक्त या जीव नहीं, बल्कि आयरन से भरपूर खारा पानी जिम्मेदार है। यह पानी टेलर ग्लेशियर के नीचे लाखों सालों से जमा है और जब यह सतह पर ऑक्सीजन के संपर्क में आता है, तो उसमें मौजूद आयरन ऑक्सीकृत होकर जंग जैसा लाल रंग पैदा कर देता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह झरना न केवल अंटार्कटिका के भूवैज्ञानिक इतिहास को समझने में मदद करता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि अत्यंत कठोर परिस्थितियों में भी सूक्ष्म जीवन और रासायनिक गतिविधियां संभव हैं। यही वजह है कि ब्लड फॉल्स आज भी वैज्ञानिक शोध और वैश्विक जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है।






