जमशेदपुर अवैध निर्माण मामला: हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी, याचिकाएं खारिज, जुर्माने की चेतावनी
जमशेदपुर अवैध निर्माण पर हाई कोर्ट सख्त, याचिकाएं खारिज, जुर्माने की चेतावनी

झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ में बुधवार को जमशेदपुर में अवैध निर्माण से जुड़े मामलों में दाखिल कई याचिकाओं पर सुनवाई हुई। ये याचिकाएं पूर्व में पारित हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर की गई थीं।
सुनवाई के बाद अदालत ने सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अवैध निर्माण करने वाले यदि इस तरह की याचिकाएं दाखिल करते हैं, तो उन पर जुर्माना लगाया जाएगा।
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी याचिकाकर्ता ने ऐसा कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं किया, जिससे यह साबित हो सके कि निर्माण कार्य नियमानुसार किया गया है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि अवैध निर्माण को बचाने का अधिकार आखिर क्यों दिया जाए।
खंडपीठ ने कहा कि अवैध निर्माण के कारण कई लोगों को न तो पर्याप्त पानी मिल पा रहा है और न ही सूर्य का प्रकाश। इससे ईमानदार और कानून का पालन करने वाले नागरिकों का जीवन प्रभावित हो रहा है। कोर्ट ने दो टूक कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी जा सकती।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पूर्व में पारित आदेश हाई कोर्ट द्वारा गठित अधिवक्ताओं की कमेटी की रिपोर्ट, प्रार्थियों और प्रतिवादियों के पक्ष को सुनने के बाद ही दिया गया था। वकीलों की इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा है कि शहर में हुए अवैध निर्माण को हटाना ही एकमात्र समाधान है।





