फरीदपुर तहसील में पेशकार से मारपीट, अधिवक्ताओं ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप; तहसील में कामकाज ठप

बरेली जिले की फरीदपुर तहसील में शुक्रवार को एसडीएम कोर्ट में बड़ा विवाद हो गया। फाइलों को लटकाने और भ्रष्टाचार के आरोपों पर शुरू हुई कहासुनी देखते-देखते हंगामे और मारपीट में बदल गई। आरोप है कि एसडीएम की मौजूदगी में उनके पेशकार कमलेश शर्मा के साथ अधिवक्ताओं ने मारपीट की और उन्हें धक्के देकर तहसील से बाहर निकाल दिया।
घटना के बाद अधिवक्ताओं ने एसडीएम कक्ष के सामने ही धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए नारेबाजी की और कहा कि तहसील में प्राइवेट कर्मचारी और कुछ अधिकारी मिलकर किसानों और अधिवक्ताओं से रुपये वसूलते हैं। जिनसे वसूली नहीं होती, उनके काम महीनों तक लटकाए जाते हैं। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि तहसील में भ्रष्टाचार का बोलबाला है और इसे खत्म करने के लिए सख्त कार्रवाई जरूरी है।
विवाद इतना बढ़ गया कि देर शाम अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में पोस्टर तक लगा दिए। इन पोस्टरों पर “एसडीएम हटाओ, तहसील बचाओ” जैसे नारे लिखे थे। इससे तहसील का माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।
पेशकार कमलेश शर्मा ने किसी तरह अपनी जान बचाकर तहसील से बाहर निकलकर बरेली कलेक्ट्रेट पहुंचकर कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों को घटना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अधिवक्ताओं ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें तहसील से बाहर निकाल दिया। इस घटना की शिकायत उन्होंने जिलाधिकारी से भी की है।
घटना के बाद तहसील में कामकाज अस्थाई रूप से ठप हो गया। दिनभर अधिवक्ता नारेबाजी करते रहे और कर्मचारी भी असमंजस में रहे। बताया गया कि पिछले तीन महीने से कोर्ट का कामकाज नहीं हो रहा था, जिससे कुछ वरिष्ठ अधिवक्ता परेशान थे। शुक्रवार को कुछ अधिवक्ता उपजिलाधिकारी मल्लिका नैन से कोर्ट लगाने के संबंध में बातचीत कर रहे थे। इसी बीच अधिवक्ताओं का एक अन्य दल वहां पहुंच गया और अपना एजेंडा लेकर विवाद शुरू कर दिया।
विवाद के दौरान अधिवक्ताओं और पेशकार के बीच कहासुनी हुई और आरोप है कि एक अधिवक्ता ने पेशकार कमलेश के साथ मारपीट कर दी। इसके बाद तहसील परिसर में हंगामा मच गया।
अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि तहसील में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों और अधिवक्ताओं से अनुचित वसूली की जाती है और काम जानबूझकर रोके जाते हैं। अधिवक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जब वे एसडीएम कार्यालय के सामने धरने पर बैठे थे, तब उपजिलाधिकारी ने जिलाधिकारी के यहां मीटिंग का बहाना बनाकर वहां से निकल गईं। इसके बाद तहसील परिसर में अधिकारियों के ऑफिस बंद हो गए।
उपजिलाधिकारी फरीदपुर मल्लिका नैन ने कहा कि अधिवक्ताओं द्वारा जो भी धरना प्रदर्शन किया गया है, उसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों द्वारा जो भी निर्देश दिए जाएंगे, उसी के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने तहसील परिसर में तनाव का माहौल बना दिया है। कर्मचारी संघ ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए जिलाधिकारी से सुरक्षा और विधिक कार्रवाई की मांग की है। अधिवक्ताओं और कर्मचारियों के बीच बढ़ते विवाद ने प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।






