बरेली में बोगस GST फर्मों का भंडाफोड़, दो गिरफ्तार
करोड़ों की हेराफेरी और 59 लाख की टैक्स चोरी का मामला, गिरोह का सरगना अभी फरार

बरेली:
बरेली में फर्जी जीएसटी फर्म बनाकर करोड़ों रुपये की हेराफेरी और लगभग 59 लाख रुपये की कर चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। क्राइम ब्रांच की एसआईटी ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों ने पूछताछ के दौरान कई वर्षों से फर्जी फर्म बनाकर सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचाने की बात स्वीकार की है। फिलहाल गिरोह का सरगना फरार है, जिसकी तलाश जारी है।
मामले में राज्य कर विभाग के उपायुक्त अनूप कुमार की ओर से 4 सितंबर 2025 को थाना किला में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि फर्जी फर्म के माध्यम से 59,17,093 रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम कर सरकार को भारी नुकसान पहुंचाया गया। रिपोर्ट में एफएस ट्रेडर्स के मालिक फरजान हाशमी उर्फ फैजी को मुख्य आरोपी नामजद किया गया था।
मामले की जांच क्राइम ब्रांच की एसआईटी कर रही थी, जिसकी जिम्मेदारी इंस्पेक्टर संजय कुमार धीर को सौंपी गई थी। जांच के दौरान फरजान हाशमी के साथ जखीरा निवासी सद्दाम हुसैन और नई मस्जिद किला निवासी समद उर्फ शाहरूख के नाम सामने आए। सोमवार को एसआईटी ने सद्दाम और समद को गिरफ्तार कर थाना किला पुलिस के हवाले कर दिया, जहां से दोनों को न्यायालय में पेश कर चालान कर दिया गया।
जांच में सामने आया कि जिस फर्म को निर्माण सामग्री जैसे सीमेंट और सरिया के व्यापार से जुड़ा दिखाया गया था, उसका वास्तविक दफ्तर कहीं मौजूद ही नहीं था। जांच टीम और जीएसटी अधिकारियों को जब फर्म का पता तलाशने की कोशिश की गई तो पता चला कि फर्म का पता फरजान हाशमी का घर था, जो इतनी संकरी गली में स्थित है कि वहां से रिक्शा तक का गुजरना मुश्किल है। ऐसे में भारी निर्माण सामग्री के ट्रक वहां तक कैसे पहुंचते थे, यह सवाल जांच में संदेह का आधार बना।
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे कई वर्षों से फर्जी फर्म बनाकर नकली इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार करते थे। इसके जरिए बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट तैयार किया जाता था और फिर जीएसटी रिफंड हासिल कर लिया जाता था। इस पूरे नेटवर्क का संचालन फरजान हाशमी करता था, जो पहले जनसेवा केंद्र चलाता था और वहीं से उसने यह नेटवर्क तैयार किया।
पुलिस ने सद्दाम हुसैन का मोबाइल फोन कब्जे में लेकर उसकी जांच की तो उसमें व्हाट्सएप चैट और ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मिली। सात अक्टूबर 2025 की रात की एक चैट में समद उर्फ शाहरूख फर्म की लॉगिन आईडी और पासवर्ड मांगते हुए दिखाई दे रहा है। इसके अलावा कई व्हाट्सएप कॉल और बातचीत के रिकॉर्ड भी मिले हैं।
जांच के दौरान “मौलाना” नाम से सेव एक मोबाइल नंबर से अकाउंट की डिटेल, लॉगिन और पासवर्ड से जुड़ी जानकारी भी सामने आई है। सद्दाम ने पुलिस को बताया कि वह फर्जी जीएसटी फर्म बनवाने का काम करता था और उसने शाहरूख के लिए भी जीएसटी फर्म बनवाई थी, जो फरजान हाशमी के कहने पर बनाई गई थी। बदले में उसे नकद रकम दी जाती थी।
सद्दाम ने यह भी बताया कि उसने फर्जी पहचान पत्र से सिम कार्ड लेकर एफएस ट्रेडर्स का जीएसटी रिटर्न दाखिल किया था और उसकी पूरी जानकारी फरजान हाशमी को भेजी थी। बाद में फरजान ने उससे फोन और सिम कार्ड भी ले लिया था।
आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि किला थाने में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद उन्होंने ही फरजान हाशमी को छिपाने में मदद की थी। फरजान उन्हें समय-समय पर नकद हिस्सा देता था। पुलिस का कहना है कि आरोपी साक्ष्यों को मिटाने की भी कोशिश कर रहे थे।
एसएसपी अनुराग आर्य के मुताबिक जिले में बोगस फर्मों का एक बड़ा नेटवर्क संचालित हो रहा था। पुलिस अब तकनीकी जांच के जरिए पूरे गिरोह का पता लगाने में जुटी है। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन से कई तस्वीरें और व्हाट्सएप चैट मिली हैं, हालांकि कई पुरानी चैट डिलीट कर दी गई हैं। मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए लैब भेजा जाएगा ताकि डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
पुलिस का कहना है कि फरार सरगना समेत अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द ही पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया जाएगा।
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