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बरेली

भोजीपुरा में BJP टिकट पर संग्राम: कौन बनेगा कमल का चेहरा?

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रिपोर्ट: देवेंद्र पटेल

बरेली: भोजीपुरा विधानसभा सीट पर इस बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसे उम्मीदवार के चयन की है, जो जातीय समीकरण, संगठनात्मक मजबूती और व्यक्तिगत प्रभाव—तीनों मानकों पर खरा उतर सके। यही कारण है कि संभावित दावेदारों की सूची लंबी होती जा रही है और हर नाम अपने-अपने समीकरणों के साथ चर्चा में है।

प्रमुख दावेदारों में योगेश पटेल का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। ब्लॉक प्रमुख के रूप में उनकी ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत पकड़ मानी जाती है, साथ ही कुर्मी समाज में उनका प्रभाव भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, पिछली बार भाजपा से टिकट न मिलने पर उनका बसपा से चुनाव लड़ना पार्टी के लिए एक अहम फैक्टर बना हुआ है। उस चुनाव में कुर्मी वोटों का बिखराव देखने को मिला था, जिसका सीधा लाभ समाजवादी पार्टी को मिला।

दूसरी ओर प्रशांत पटेल एक युवा और सक्रिय चेहरा बनकर उभरे हैं। जिला पंचायत प्रतिनिधि के रूप में उनकी जमीनी पकड़ और युवाओं के बीच सक्रियता उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है। संगठन के साथ बेहतर तालमेल और अपेक्षाकृत साफ-सुथरी छवि उनके पक्ष में जाती है, जिससे उन्हें “फ्रेश फेस” के तौर पर देखा जा रहा है।

अनुभव के लिहाज से बहोरन लाल मौर्य भी इस दौड़ में पीछे नहीं हैं। मौर्य समाज में उनकी मजबूत पकड़ और लंबा राजनीतिक अनुभव उन्हें एक प्रभावशाली विकल्प बनाता है। भोजीपुरा में मौर्य वोट बैंक की अहम भूमिका को देखते हुए उनकी दावेदारी को गंभीरता से लिया जा रहा है।

इसके अलावा भुवनेश गंगवार भी टिकट की रेस में शामिल हैं। पूर्व विधायक वीरेंद्र सिंह के पुत्र होने के कारण उन्हें राजनीतिक विरासत और क्षेत्रीय पहचान का लाभ मिलता है। गंगवार समाज में उनकी पकड़ और समर्थकों का नेटवर्क उनके पक्ष को मजबूती देता है, हालांकि उन्हें खुद को पूरी तरह स्थापित करने की चुनौती भी बनी हुई है।

भोजीपुरा विधानसभा क्षेत्र को मौर्य और कुर्मी मतदाताओं का गढ़ माना जाता है। ऐसे में भाजपा के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह ऐसा उम्मीदवार चुने, जो इन दोनों वर्गों के बीच संतुलन कायम रख सके और वोटों के बिखराव को रोक सके। पिछला चुनाव इसका उदाहरण रहा है, जब जातीय समीकरणों के कारण परिणाम प्रभावित हुआ था।

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व इस बार बेहद सतर्क रणनीति के तहत निर्णय लेने की तैयारी में है। स्थानीय संगठन की रिपोर्ट, उम्मीदवारों की स्वीकार्यता, जातीय संतुलन और विपक्ष की रणनीति—इन सभी पहलुओं पर गहन मंथन किया जा रहा है।

फिलहाल भोजीपुरा सीट पर मुकाबला पूरी तरह खुला नजर आ रहा है। यही वजह है कि यह सीट प्रदेश की सबसे दिलचस्प राजनीतिक जंगों में शामिल हो गई है, जहां हर दावेदार अपनी पूरी ताकत झोंक रहा है और अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान के हाथ में है।

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