बरेली में बिजली संकट गहराया, 15 दिन में 54 ट्रांसफार्मर फुंके

बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में बढ़ती गर्मी के साथ बिजली व्यवस्था चरमराती नजर आ रही है। तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचते ही शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक बिजली संकट गहराने लगा है। बीते 15 दिनों में लगभग 54 ट्रांसफार्मर फुंकने की घटनाएं सामने आई हैं, जो इस बात का संकेत हैं कि बढ़ते लोड के सामने सिस्टम कमजोर पड़ रहा है।
सोमवार को शहर के कई इलाकों में दिनभर ट्रिपिंग, लोकल फॉल्ट और केबल खराब होने की शिकायतें दर्ज की गईं। बंच केबल और केबल बॉक्स में आग लगने की घटनाओं के चलते कई मोहल्लों में घंटों बिजली आपूर्ति बाधित रही। बिजली कटौती का असर केवल रोशनी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जलापूर्ति भी प्रभावित हुई, जिससे लोगों को दोहरी परेशानी झेलनी पड़ी।
ग्रामीण क्षेत्रों में हालात ज्यादा खराब
आंकड़ों के अनुसार, 15 अप्रैल तक शहरी क्षेत्र में 5 और ग्रामीण क्षेत्रों में 49 ट्रांसफार्मर फुंक चुके हैं। यह अंतर साफ दर्शाता है कि देहात में बिजली ढांचे की स्थिति अधिक कमजोर है। बढ़ते लोड और सीमित संसाधनों के कारण ग्रामीण इलाकों में संकट और गहरा गया है।
तैयारियों पर उठे सवाल
गर्मी से पहले विद्युत विभाग ने व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए बड़े स्तर पर बजट खर्च करने का दावा किया था, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से मेल नहीं खाती। लगातार ट्रांसफार्मर फेल होना और फॉल्ट की घटनाएं बढ़ना विभागीय तैयारियों पर सवाल खड़े कर रहा है।
हालांकि, उच्च स्तर पर यह निर्देश दिए गए थे कि ट्रांसफार्मर फुंकने की स्थिति में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी, लेकिन अब तक किसी ठोस कदम के संकेत नहीं मिले हैं।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा परेशानी
शहर के कई प्रमुख इलाकों में बिजली संकट अधिक गंभीर रहा। इनमें रामनाथ डेयरी, इस्लामियां इंटर कॉलेज, नावल्टी चौराहा, किला, चौपुला, बिहारीपुर, सुभाषनगर, कटरा चांद खां, नवादा शेखान और मिशन कंपाउंड जैसे इलाके शामिल हैं। कई स्थानों पर पेड़ों की छंटाई के दौरान भी बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बाधित करनी पड़ी।
आगे और बढ़ सकती है चुनौती
मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। ऐसे में बिजली की मांग में और वृद्धि होगी, जिससे मौजूदा संकट और गंभीर हो सकता है।
क्या हैं प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार बिजली संकट के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं—
- बढ़ता लोड और पुराना विद्युत नेटवर्क
- ट्रांसफार्मरों पर क्षमता से अधिक दबाव
- समय पर रखरखाव की कमी
- ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर






