बरेली में तूफान आंधी ने उजाड़े घर-आंगन, दो मौतों से दहला जिला… बिजली-पानी संकट के बीच सहमा शहर

बरेली में तूफान आंधी ने उजाड़े घर-आंगन, दो मौतों से दहला जिला… बिजली-पानी संकट के बीच सहमा शहर
75 KM की रफ्तार से चली हवा, पेड़-खंभे उखड़े… बरेली में दूसरे दिन भी तबाही का मंजर
बरेली। मई की तपती दोपहर में अचानक बदले मौसम ने बुधवार को पूरे जिले को दहला दिया। सुबह करीब साढ़े 11 बजे आसमान पर काले बादल छाए और देखते ही देखते तेज आंधी व बारिश ने ऐसा कहर बरपाया कि कई इलाकों में चीख-पुकार मच गई। कहीं मासूम छात्रा की जिंदगी आम के पेड़ के नीचे दबकर खत्म हो गई तो कहीं घर जा रही बुजुर्ग महिला मौत का शिकार बन गई। सैकड़ों पेड़ धराशायी हो गए, बिजली के खंभे टूट गए और शहर से लेकर देहात तक कई इलाकों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई।
आंधी की रफ्तार इतनी तेज थी कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। सड़कें कुछ ही मिनटों में मलबे, टूटे पेड़ों और बिजली के तारों से पट गईं। कई इलाकों में लोग घरों में कैद होकर रह गए, जबकि बाजारों में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला।
आम के पेड़ के नीचे दब गई सातवीं की छात्रा
सबसे दर्दनाक हादसा भमोरा क्षेत्र के हररामपुर गांव में हुआ। यहां कक्षा सात में पढ़ने वाली छात्रा देवकी तेज आंधी के दौरान अचानक गिरे आम के विशाल पेड़ की चपेट में आ गई। आसपास मौजूद लोग जब तक उसे बाहर निकालते, तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। घटना के बाद गांव में मातम पसर गया। परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है।
बेटी के घर जा रही बुजुर्ग महिला की दर्दनाक मौत
दूसरी घटना नितोई गांव में हुई। तेज तूफान के दौरान एक लकड़ी की बल्ली उड़कर दीवार से जा टकराई, जिससे दीवार की ईंटें भरभराकर गिर पड़ीं। इसी दौरान वहां से गुजर रहीं बुजुर्ग महिला गोमती गंभीर रूप से घायल हो गईं। सिर में गहरी चोट लगने के कारण मौके पर ही उनकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वह अपनी बेटी के घर जा रही थीं।
सड़क से लेकर स्कूल तक तबाही के निशान
भमोरा कस्बे में आंधी के दौरान पेड़ गिरने से दो स्कूलों की चार बसें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। हालांकि राहत की बात रही कि बसों में उस समय बच्चे मौजूद नहीं थे। बिशारतगंज क्षेत्र में रम्पुरा-अलीगंज मार्ग पर चलते टेंपो पर पेड़ गिर गया, जिसमें एक व्यक्ति घायल हो गया। कई घंटे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा।
आंवला रोड पर तेज हवा के कारण एक बड़ा साइन बोर्ड सड़क पर गिर पड़ा। गनीमत रही कि कोई वाहन उसकी चपेट में नहीं आया। पुलिस और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर क्रेन की मदद से बोर्ड हटवाया और यातायात बहाल कराया।
बिजली संकट ने बढ़ाई परेशानी, कई इलाकों में अंधेरा
तेज आंधी के कारण जिलेभर में बिजली व्यवस्था चरमरा गई। जगह-जगह बिजली के खंभे टूटने और तार गिरने से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति बाधित हो गई। पीलीभीत बाईपास, श्रीनगर आवास कॉलोनी, भमोरा, बिशारतगंज और आंवला क्षेत्र सहित कई इलाकों में घंटों तक बिजली गुल रही। लोगों को पानी की समस्या का भी सामना करना पड़ा।
दो दिन में बदला मौसम का मिजाज
मंगलवार से शुरू हुआ खराब मौसम बुधवार को और भयावह रूप में सामने आया। मौसम विभाग के अनुसार बीते 24 घंटों में अधिकतम तापमान में करीब 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। शहर में 11.8 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई जबकि हवा की रफ्तार 70 से 75 किलोमीटर प्रतिघंटा तक पहुंच गई।
मौसम वैज्ञानिक ने बताई वजह
मौसम विशेषज्ञ अतुल कुमार सिंह के अनुसार प्रदेश के मध्य हिस्से में सक्रिय चक्रवाती प्रभाव और पुरवा-पछुआ हवाओं के टकराव के कारण यह स्थिति बनी। अगले दो दिनों तक बादल छाए रहने और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। हालांकि 14 मई के बाद मौसम के शुष्क होने का अनुमान है।
प्रशासन अलर्ट, लेकिन सवाल बरकरार
आंधी ने एक बार फिर प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोल दी। कई इलाकों में पुराने और जर्जर पेड़ पहले से खतरा बने हुए थे, लेकिन समय रहते कटान या छंटाई नहीं कराई गई। बिजली विभाग की व्यवस्थाएं भी तेज हवाओं के सामने पूरी तरह ध्वस्त नजर आईं। अब सवाल उठ रहा है कि हर साल आने वाली आंधी-बारिश के बावजूद आपदा प्रबंधन की तैयारियां आखिर कागजों तक ही क्यों सीमित रह जाती हैं।






